17 नवंबर 2017 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (15:29 तक), नक्षत्र स्वाति (17:10 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 10:45 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:26
रात 06:46 तक
तिथि
चतुर्दशी, 15:29 तक
अमावस्या
नक्षत्र
स्वाति, 17:10 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2017 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 15:29 तक
अमावस्या 17:12, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 17:10 तक
विशाखा 19:24, 18 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 21:00 तक
शोभन 21:16, 18 नव॰ तक
करण
शकुनि 15:29 तक
चतुष्पद 04:18, 18 नव॰ तक
नाग 17:12, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
05:27
चंद्रास्त
17:01
दिनमान
10h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 12:05
यमगंड
14:46 – 16:06
गुलिक काल
08:05 – 09:25

17 नवंबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:45 – 08:05सामान्य
लाभ08:05 – 09:25शुभ
अमृत09:25 – 10:45शुभ
काल10:45 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:26शुभ
रोग13:26 – 14:46टालें
उद्वेग14:46 – 16:06टालें
चर16:06 – 17:26सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:26 – 19:06टालें
काल19:06 – 20:46टालें
लाभ20:46 – 22:26शुभ
उद्वेग22:26 – 00:06टालें
शुभ00:06 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:26शुभ
चर03:26 – 05:06सामान्य
रोग05:06 – 06:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4507:38दिन
बुध07:3808:32दिन
चंद्र08:3209:25दिन
शनि09:2510:19दिन
गुरु10:1911:12दिन
मंगल11:1212:05दिन
सूर्य12:0512:59दिन
शुक्र12:5913:52दिन
बुध13:5214:46दिन
चंद्र14:4615:39दिन
शनि15:3916:33दिन
गुरु16:3317:26दिन
मंगल17:2618:33रात
सूर्य18:3319:39रात
शुक्र19:3920:46रात
बुध20:4621:53रात
चंद्र21:5322:59रात
शनि22:5900:06रात
गुरु00:0601:13रात
मंगल01:1302:19रात
सूर्य02:1903:26रात
शुक्र03:2604:32रात
बुध04:3205:39रात
चंद्र05:3906:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 नव॰ 2017मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
22 नव॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 नव॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 दिस॰ 2017मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
7 दिस॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 दिस॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 दिस॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 दिस॰ 2017धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1068° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।