7 दिसंबर 2017 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (07:15 तक), नक्षत्र पुष्य (19:54 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 13:30 से 14:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 17:24
रात 07:01 तक
तिथि
पंचमी, 04:44 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुष्य, 19:54 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 दिसंबर 2017 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 07:15 तक
कृष्ण पंचमी 04:44, 8 दिस॰ तक
कृष्ण षष्ठी 02:52, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 19:54 तक
आश्लेषा 18:27, 8 दिस॰ तक
योग
ब्रह्म 12:17 तक
इंद्र 09:08, 8 दिस॰ तक
करण
बालव 07:15 तक
कौलव 17:55 तक
तैतिल 04:44, 8 दिस॰ तक
गर 15:43, 8 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
21:33
चंद्रास्त
10:25
दिनमान
10h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
13:30 – 14:48
यमगंड
07:00 – 08:18
गुलिक काल
09:36 – 10:54

7 दिसंबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:00 – 08:18शुभ
रोग08:18 – 09:36टालें
उद्वेग09:36 – 10:54टालें
चर10:54 – 12:12सामान्य
लाभ12:12 – 13:30शुभ
अमृत13:30 – 14:48शुभ
काल14:48 – 16:06टालें
शुभ16:06 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:24 – 19:06शुभ
चर19:06 – 20:48सामान्य
रोग20:48 – 22:30टालें
काल22:30 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 01:55शुभ
उद्वेग01:55 – 03:37टालें
शुभ03:37 – 05:19शुभ
अमृत05:19 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:0007:52दिन
मंगल07:5208:44दिन
सूर्य08:4409:36दिन
शुक्र09:3610:28दिन
बुध10:2811:20दिन
चंद्र11:2012:12दिन
शनि12:1213:04दिन
गुरु13:0413:56दिन
मंगल13:5614:48दिन
सूर्य14:4815:40दिन
शुक्र15:4016:32दिन
बुध16:3217:24दिन
चंद्र17:2418:32रात
शनि18:3219:40रात
गुरु19:4020:48रात
मंगल20:4821:56रात
सूर्य21:5623:04रात
शुक्र23:0400:12रात
बुध00:1201:21रात
चंद्र01:2102:29रात
शनि02:2903:37रात
गुरु03:3704:45रात
मंगल04:4505:53रात
सूर्य05:5307:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 दिस॰ 2017संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 दिस॰ 2017कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 दिस॰ 2017कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 दिस॰ 2017धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2017पौष अमावस्याअमावस्या
22 दिस॰ 2017विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 दिस॰ 2017शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 जन॰ 2018पौष पूर्णिमापूर्णिमा
5 जन॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1075° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।