21 फ़रवरी 2022 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (19:58 तक), नक्षत्र चित्रा (16:16 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 08:19 से 09:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 18:15
रात 06:53 तक
तिथि
पंचमी, 19:58 तक
षष्ठी
नक्षत्र
चित्रा, 16:16 तक
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 फ़रवरी 2022 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 19:58 तक
कृष्ण षष्ठी 18:34, 22 फ़र॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 16:16 तक
स्वाति 15:35, 22 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 13:05 तक
वृद्धि 10:51, 22 फ़र॰ तक
करण
कौलव 08:33 तक
तैतिल 19:58 तक
गर 07:18, 22 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
22:52
चंद्रास्त
09:42
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2078
शक संवत
1943, प्लव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:19 – 09:44
यमगंड
11:09 – 12:34
गुलिक काल
14:00 – 15:25

21 फ़रवरी 2022 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:54 – 08:19शुभ
काल08:19 – 09:44टालें
शुभ09:44 – 11:09शुभ
रोग11:09 – 12:34टालें
उद्वेग12:34 – 14:00टालें
चर14:00 – 15:25सामान्य
लाभ15:25 – 16:50शुभ
अमृत16:50 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:15 – 19:50सामान्य
रोग19:50 – 21:24टालें
काल21:24 – 22:59टालें
लाभ22:59 – 00:34शुभ
उद्वेग00:34 – 02:09टालें
शुभ02:09 – 03:43शुभ
अमृत03:43 – 05:18शुभ
चर05:18 – 06:53सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5407:51दिन
शनि07:5108:47दिन
गुरु08:4709:44दिन
मंगल09:4410:41दिन
सूर्य10:4111:38दिन
शुक्र11:3812:34दिन
बुध12:3413:31दिन
चंद्र13:3114:28दिन
शनि14:2815:25दिन
गुरु15:2516:21दिन
मंगल16:2117:18दिन
सूर्य17:1818:15दिन
शुक्र18:1519:18रात
बुध19:1820:21रात
चंद्र20:2121:24रात
शनि21:2422:28रात
गुरु22:2823:31रात
मंगल23:3100:34रात
सूर्य00:3401:37रात
शुक्र01:3702:40रात
बुध02:4003:43रात
चंद्र03:4304:47रात
शनि04:4705:50रात
गुरु05:5006:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 फ़र॰ 2022कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 फ़र॰ 2022कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 फ़र॰ 2022प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 मार्च 2022फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
6 मार्च 2022विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 मार्च 2022शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 मार्च 2022मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2022प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 मार्च 2022फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
22 मार्च 2022संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1663° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।