31 मई 2022 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 31 मई 2022, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 31 मई 2022 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (19:19 तक), नक्षत्र रोहिणी (10:01 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:24 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 15:46 से 17:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:24 – 19:13
रात 05:23 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:19 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 10:01 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मई 2022 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 19:19 तक
शुक्ल द्वितीया 21:47, 1 जून तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:01 तक
मृगशिरा 13:00, 1 जून तक
योग
धृति 00:32, 1 जून तक
शूलअशुभ 01:33, 2 जून तक
करण
किंस्तुघ्न 06:08 तक
बव 19:19 तक
बालव 08:32, 1 जून तक
चंद्र राशि
वृषभ 23:29 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:24
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
05:45
चंद्रास्त
20:12
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2079
शक संवत
1944, शुभकृत संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
15:46 – 17:30
यमगंड
08:51 – 10:35
गुलिक काल
12:18 – 14:02

31 मई 2022 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:24 – 07:07टालें
उद्वेग07:07 – 08:51टालें
चर08:51 – 10:35सामान्य
लाभ10:35 – 12:18शुभ
अमृत12:18 – 14:02शुभ
काल14:02 – 15:46टालें
शुभ15:46 – 17:30शुभ
रोग17:30 – 19:13टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:13 – 20:30टालें
लाभ20:30 – 21:46शुभ
उद्वेग21:46 – 23:02टालें
शुभ23:02 – 00:18शुभ
अमृत00:18 – 01:35शुभ
चर01:35 – 02:51सामान्य
रोग02:51 – 04:07टालें
काल04:07 – 05:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2406:33दिन
सूर्य06:3307:42दिन
शुक्र07:4208:51दिन
बुध08:5110:00दिन
चंद्र10:0011:09दिन
शनि11:0912:18दिन
गुरु12:1813:28दिन
मंगल13:2814:37दिन
सूर्य14:3715:46दिन
शुक्र15:4616:55दिन
बुध16:5518:04दिन
चंद्र18:0419:13दिन
शनि19:1320:04रात
गुरु20:0420:55रात
मंगल20:5521:46रात
सूर्य21:4622:37रात
शुक्र22:3723:28रात
बुध23:2800:18रात
चंद्र00:1801:09रात
शनि01:0902:00रात
गुरु02:0002:51रात
मंगल02:5103:42रात
सूर्य03:4204:32रात
शुक्र04:3205:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जून 2022विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जून 2022शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जून 2022प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जून 2022ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2022मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जून 2022संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 जून 2022कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 जून 2022कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 जून 2022प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जून 2022आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1701° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।