30 अगस्त 2027 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 30 अगस्त 2027, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 30 अगस्त 2027 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:13 तक), नक्षत्र आश्लेषा (01:03, 31 अग॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 07:33 से 09:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:45
रात 05:58 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:41 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आश्लेषा, 01:03 तक
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अगस्त 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:13 तक
कृष्ण चतुर्दशी 02:41, 31 अग॰ तक
अमावस्या 23:11, 31 अग॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 01:03, 31 अग॰ तक
मघा 22:20, 31 अग॰ तक
योग
परिघअशुभ 01:36, 31 अग॰ तक
शिव 21:36, 31 अग॰ तक
करण
वणिज 06:13 तक
विष्टि (भद्रा) 16:27 तक
शकुनि 02:41, 31 अग॰ तक
चतुष्पद 12:55, 31 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 01:03, 31 अग॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
04:05
चंद्रास्त
17:45
दिनमान
12h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
07:33 – 09:09
यमगंड
10:45 – 12:21
गुलिक काल
13:57 – 15:33

30 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:58 – 07:33शुभ
काल07:33 – 09:09टालें
शुभ09:09 – 10:45शुभ
रोग10:45 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 13:57टालें
चर13:57 – 15:33सामान्य
लाभ15:33 – 17:09शुभ
अमृत17:09 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:45 – 20:09सामान्य
रोग20:09 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:57टालें
लाभ22:57 – 00:21शुभ
उद्वेग00:21 – 01:46टालें
शुभ01:46 – 03:10शुभ
अमृत03:10 – 04:34शुभ
चर04:34 – 05:58सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5807:01दिन
शनि07:0108:05दिन
गुरु08:0509:09दिन
मंगल09:0910:13दिन
सूर्य10:1311:17दिन
शुक्र11:1712:21दिन
बुध12:2113:25दिन
चंद्र13:2514:29दिन
शनि14:2915:33दिन
गुरु15:3316:37दिन
मंगल16:3717:41दिन
सूर्य17:4118:45दिन
शुक्र18:4519:41रात
बुध19:4120:37रात
चंद्र20:3721:33रात
शनि21:3322:29रात
गुरु22:2923:25रात
मंगल23:2500:21रात
सूर्य00:2101:18रात
शुक्र01:1802:14रात
बुध02:1403:10रात
चंद्र03:1004:06रात
शनि04:0605:02रात
गुरु05:0205:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2434° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।