22 अगस्त 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 22 अगस्त 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 अगस्त 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (22:35 तक), नक्षत्र रोहिणी (22:31 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:53
रात 05:54 तक
तिथि
नवमी, 22:35 तक
दशमी
नक्षत्र
रोहिणी, 22:31 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2030 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 22:35 तक
कृष्ण दशमी 00:57, 24 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 22:31 तक
मृगशिरा 01:26, 24 अग॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 12:26 तक
हर्षण 13:26, 23 अग॰ तक
करण
तैतिल 09:18 तक
गर 22:35 तक
वणिज 11:48, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:57
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:38
यमगंड
05:54 – 07:31
गुलिक काल
09:08 – 10:46

22 अगस्त 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:54 – 07:31शुभ
रोग07:31 – 09:08टालें
उद्वेग09:08 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:23सामान्य
लाभ12:23 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:38शुभ
काल15:38 – 17:16टालें
शुभ17:16 – 18:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:53 – 20:16शुभ
चर20:16 – 21:38सामान्य
रोग21:38 – 23:01टालें
काल23:01 – 00:24टालें
लाभ00:24 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:31शुभ
अमृत04:31 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5406:59दिन
मंगल06:5908:04दिन
सूर्य08:0409:08दिन
शुक्र09:0810:13दिन
बुध10:1311:18दिन
चंद्र11:1812:23दिन
शनि12:2313:28दिन
गुरु13:2814:33दिन
मंगल14:3315:38दिन
सूर्य15:3816:43दिन
शुक्र16:4317:48दिन
बुध17:4818:53दिन
चंद्र18:5319:48रात
शनि19:4820:43रात
गुरु20:4321:38रात
मंगल21:3822:34रात
सूर्य22:3423:29रात
शुक्र23:2900:24रात
बुध00:2401:19रात
चंद्र01:1902:14रात
शनि02:1403:09रात
गुरु03:0904:04रात
मंगल04:0404:59रात
सूर्य04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अग॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अग॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 अग॰ 2030भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
1 सित॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 सित॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 सित॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 सित॰ 2030भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
15 सित॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 सित॰ 2030कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2851° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।