2 अक्टूबर 2030 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 2 अक्टूबर 2030, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 अक्टूबर 2030 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (00:33, 3 अक्टू॰ तक), नक्षत्र अनुराधा (06:36 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:06 पर है। राहुकाल 12:10 से 13:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:06
रात 06:15 तक
तिथि
षष्ठी, 00:33 तक
सप्तमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 05:02 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2030 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 00:33, 3 अक्टू॰ तक
शुक्ल सप्तमी 22:24, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 05:02, 3 अक्टू॰ तक
मूल 03:41, 4 अक्टू॰ तक
योग
आयुष्मान 20:19 तक
सौभाग्य 17:24, 3 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 13:42 तक
तैतिल 00:33, 3 अक्टू॰ तक
गर 11:27, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 05:02, 3 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:06
चंद्रोदय
11:18
चंद्रास्त
22:00
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2087
शक संवत
1952, साधारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:34 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:10 – 13:39
यमगंड
07:43 – 09:12
गुलिक काल
10:41 – 12:10

2 अक्टूबर 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:14 – 07:43शुभ
अमृत07:43 – 09:12शुभ
काल09:12 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:10शुभ
रोग12:10 – 13:39टालें
उद्वेग13:39 – 15:08टालें
चर15:08 – 16:37सामान्य
लाभ16:37 – 18:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:06 – 19:37टालें
शुभ19:37 – 21:08शुभ
अमृत21:08 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:10सामान्य
रोग00:10 – 01:41टालें
काल01:41 – 03:12टालें
लाभ03:12 – 04:43शुभ
उद्वेग04:43 – 06:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1407:13दिन
चंद्र07:1308:13दिन
शनि08:1309:12दिन
गुरु09:1210:11दिन
मंगल10:1111:11दिन
सूर्य11:1112:10दिन
शुक्र12:1013:09दिन
बुध13:0914:08दिन
चंद्र14:0815:08दिन
शनि15:0816:07दिन
गुरु16:0717:06दिन
मंगल17:0618:06दिन
सूर्य18:0619:06रात
शुक्र19:0620:07रात
बुध20:0721:08रात
चंद्र21:0822:09रात
शनि22:0923:09रात
गुरु23:0900:10रात
मंगल00:1001:11रात
सूर्य01:1102:12रात
शुक्र02:1203:12रात
बुध03:1204:13रात
चंद्र04:1305:14रात
शनि05:1406:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 अक्टू॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 अक्टू॰ 2030आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
15 अक्टू॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2030तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अक्टू॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2030कार्तिक अमावस्याअमावस्या
30 अक्टू॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2866° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।