5 अगस्त 2032 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 5 अगस्त 2032, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 अगस्त 2032 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (08:30 तक), नक्षत्र पुष्य (04:00, 6 अग॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 14:07 से 15:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:08
रात 05:45 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
पुष्य, 04:00 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अगस्त 2032 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 08:30 तक
अमावस्या 10:41, 6 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 04:00, 6 अग॰ तक
आश्लेषा 06:53, 7 अग॰ तक
योग
सिद्धि 22:18 तक
व्यतीपातअशुभ 23:10, 6 अग॰ तक
करण
शकुनि 08:30 तक
चतुष्पद 21:34 तक
नाग 10:41, 6 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
04:52
चंद्रास्त
18:22
दिनमान
13h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2089
शक संवत
1954, परिधावी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:07 – 15:47
यमगंड
05:45 – 07:25
गुलिक काल
09:06 – 10:46

5 अगस्त 2032 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:45 – 07:25शुभ
रोग07:25 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 14:07शुभ
अमृत14:07 – 15:47शुभ
काल15:47 – 17:28टालें
शुभ17:28 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:08 – 20:28शुभ
चर20:28 – 21:48सामान्य
रोग21:48 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:26शुभ
अमृत04:26 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4506:52दिन
मंगल06:5207:59दिन
सूर्य07:5909:06दिन
शुक्र09:0610:13दिन
बुध10:1311:19दिन
चंद्र11:1912:26दिन
शनि12:2613:33दिन
गुरु13:3314:40दिन
मंगल14:4015:47दिन
सूर्य15:4716:54दिन
शुक्र16:5418:01दिन
बुध18:0119:08दिन
चंद्र19:0820:01रात
शनि20:0120:54रात
गुरु20:5421:48रात
मंगल21:4822:41रात
सूर्य22:4123:34रात
शुक्र23:3400:27रात
बुध00:2701:20रात
चंद्र01:2002:13रात
शनि02:1303:06रात
गुरु03:0603:59रात
मंगल03:5904:52रात
सूर्य04:5205:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अग॰ 2032श्रावण अमावस्याअमावस्या
10 अग॰ 2032विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अग॰ 2032सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अग॰ 2032शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अग॰ 2032प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अग॰ 2032श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
24 अग॰ 2032संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 अग॰ 2032कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 अग॰ 2032कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 सित॰ 2032प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3124° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।