1 मई 2033 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 1 मई 2033, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 मई 2033 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (00:33, 2 मई तक), नक्षत्र रोहिणी (00:27, 2 मई तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 18:56 पर है। राहुकाल 17:16 से 18:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 18:56
रात 05:39 तक
तिथि
तृतीया, 00:33 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रोहिणी, 00:27 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 मई 2033 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 00:33, 2 मई तक
शुक्ल चतुर्थी 23:08, 2 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 00:27, 2 मई तक
मृगशिरा 23:46, 2 मई तक
योग
शोभन 17:56 तक
अतिगंडअशुभ 15:32, 2 मई तक
करण
तैतिल 13:31 तक
गर 00:33, 2 मई तक
वणिज 11:45, 2 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
18:56
चंद्रोदय
07:30
चंद्रास्त
21:23
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2090
शक संवत
1955, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
17:16 – 18:56
यमगंड
12:18 – 13:57
गुलिक काल
15:37 – 17:16

1 मई 2033 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:40 – 07:19टालें
चर07:19 – 08:59सामान्य
लाभ08:59 – 10:38शुभ
अमृत10:38 – 12:18शुभ
काल12:18 – 13:57टालें
शुभ13:57 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 17:16टालें
उद्वेग17:16 – 18:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:56 – 20:16शुभ
अमृत20:16 – 21:37शुभ
चर21:37 – 22:57सामान्य
रोग22:57 – 00:18टालें
काल00:18 – 01:38टालें
लाभ01:38 – 02:58शुभ
उद्वेग02:58 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4006:46दिन
शुक्र06:4607:53दिन
बुध07:5308:59दिन
चंद्र08:5910:05दिन
शनि10:0511:12दिन
गुरु11:1212:18दिन
मंगल12:1813:24दिन
सूर्य13:2414:31दिन
शुक्र14:3115:37दिन
बुध15:3716:43दिन
चंद्र16:4317:50दिन
शनि17:5018:56दिन
गुरु18:5619:50रात
मंगल19:5020:43रात
सूर्य20:4321:37रात
शुक्र21:3722:30रात
बुध22:3023:24रात
चंद्र23:2400:18रात
शनि00:1801:11रात
गुरु01:1102:05रात
मंगल02:0502:58रात
सूर्य02:5803:52रात
शुक्र03:5204:46रात
बुध04:4605:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 मई 2033विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मई 2033शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मई 2033प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मई 2033वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2033वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मई 2033संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मई 2033कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 मई 2033कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 मई 2033प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 मई 2033ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3227° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।