30 अगस्त 2033 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 30 अगस्त 2033, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 30 अगस्त 2033 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (15:03 तक), नक्षत्र स्वाति (05:11, 31 अग॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 15:33 से 17:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:44
रात 05:58 तक
तिथि
पंचमी, 15:03 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 05:11 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अगस्त 2033 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 15:03 तक
शुक्ल षष्ठी 17:22, 31 अग॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 05:11, 31 अग॰ तक
विशाखा 07:49, 1 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 04:43, 31 अग॰ तक
इंद्र 05:24, 1 सित॰ तक
करण
बालव 15:03 तक
कौलव 04:16, 31 अग॰ तक
तैतिल 17:22, 31 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
10:25
चंद्रास्त
21:52
दिनमान
12h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2090
शक संवत
1955, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
15:33 – 17:09
यमगंड
09:09 – 10:45
गुलिक काल
12:21 – 13:57

30 अगस्त 2033 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 – 07:34टालें
उद्वेग07:34 – 09:09टालें
चर09:09 – 10:45सामान्य
लाभ10:45 – 12:21शुभ
अमृत12:21 – 13:57शुभ
काल13:57 – 15:33टालें
शुभ15:33 – 17:09शुभ
रोग17:09 – 18:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:44 – 20:09टालें
लाभ20:09 – 21:33शुभ
उद्वेग21:33 – 22:57टालें
शुभ22:57 – 00:21शुभ
अमृत00:21 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:10सामान्य
रोग03:10 – 04:34टालें
काल04:34 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5807:02दिन
सूर्य07:0208:06दिन
शुक्र08:0609:09दिन
बुध09:0910:13दिन
चंद्र10:1311:17दिन
शनि11:1712:21दिन
गुरु12:2113:25दिन
मंगल13:2514:29दिन
सूर्य14:2915:33दिन
शुक्र15:3316:37दिन
बुध16:3717:40दिन
चंद्र17:4018:44दिन
शनि18:4419:40रात
गुरु19:4020:37रात
मंगल20:3721:33रात
सूर्य21:3322:29रात
शुक्र22:2923:25रात
बुध23:2500:21रात
चंद्र00:2101:17रात
शनि01:1702:14रात
गुरु02:1403:10रात
मंगल03:1004:06रात
सूर्य04:0605:02रात
शुक्र05:0205:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 सित॰ 2033शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 सित॰ 2033प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 सित॰ 2033भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
12 सित॰ 2033संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 सित॰ 2033कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2033कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2033कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 सित॰ 2033प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 सित॰ 2033आश्विन अमावस्याअमावस्या
27 सित॰ 2033विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3273° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।