5 सितंबर 2034 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 5 सितंबर 2034, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 5 सितंबर 2034 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (06:18 तक), नक्षत्र रोहिणी (01:07, 6 सित॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 15:28 से 17:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:38
रात 06:01 तक
तिथि
अष्टमी, 04:07 तक
नवमी
नक्षत्र
रोहिणी, 01:07 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2034 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 06:18 तक
कृष्ण अष्टमी 04:07, 6 सित॰ तक
कृष्ण नवमी 02:10, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 01:07, 6 सित॰ तक
मृगशिरा 23:54, 6 सित॰ तक
योग
हर्षण 16:09 तक
वज्रअशुभ 13:23, 6 सित॰ तक
करण
बव 06:18 तक
बालव 17:11 तक
कौलव 04:07, 6 सित॰ तक
तैतिल 15:07, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
23:47
चंद्रास्त
12:38
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2091
शक संवत
1956, आनंद संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
15:28 – 17:03
यमगंड
09:10 – 10:45
गुलिक काल
12:19 – 13:54

5 सितंबर 2034 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:01 – 07:35टालें
उद्वेग07:35 – 09:10टालें
चर09:10 – 10:45सामान्य
लाभ10:45 – 12:19शुभ
अमृत12:19 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:28टालें
शुभ15:28 – 17:03शुभ
रोग17:03 – 18:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:38 – 20:03टालें
लाभ20:03 – 21:29शुभ
उद्वेग21:29 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:19शुभ
अमृत00:19 – 01:45शुभ
चर01:45 – 03:10सामान्य
रोग03:10 – 04:36टालें
काल04:36 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0107:04दिन
सूर्य07:0408:07दिन
शुक्र08:0709:10दिन
बुध09:1010:13दिन
चंद्र10:1311:16दिन
शनि11:1612:19दिन
गुरु12:1913:22दिन
मंगल13:2214:25दिन
सूर्य14:2515:28दिन
शुक्र15:2816:32दिन
बुध16:3217:35दिन
चंद्र17:3518:38दिन
शनि18:3819:35रात
गुरु19:3520:32रात
मंगल20:3221:29रात
सूर्य21:2922:26रात
शुक्र22:2623:22रात
बुध23:2200:19रात
चंद्र00:1901:16रात
शनि01:1602:13रात
गुरु02:1303:10रात
मंगल03:1004:07रात
सूर्य04:0705:04रात
शुक्र05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 सित॰ 2034कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 सित॰ 2034कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 सित॰ 2034प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 सित॰ 2034भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
16 सित॰ 2034विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2034कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
24 सित॰ 2034शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 सित॰ 2034प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 सित॰ 2034भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
1 अक्टू॰ 2034संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3415° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।