4 जनवरी 2035 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 4 जनवरी 2035, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 जनवरी 2035 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (08:50 तक), नक्षत्र स्वाति (10:24 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 13:43 से 15:01 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:37
रात 07:14 तक
तिथि
एकादशी
नक्षत्र
स्वाति, 10:24 तक
विशाखा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जनवरी 2035 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 08:50 तक
कृष्ण एकादशी 11:27, 5 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 10:24 तक
विशाखा 13:25, 5 जन॰ तक
योग
धृति 00:09, 5 जन॰ तक
शूलअशुभ 01:03, 6 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:50 तक
बव 22:08 तक
बालव 11:27, 5 जन॰ तक
चंद्र राशि
तुला 06:40, 5 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
02:30
चंद्रास्त
13:57
दिनमान
10h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2091
शक संवत
1956, आनंद संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
13:43 – 15:01
यमगंड
07:14 – 08:32
गुलिक काल
09:50 – 11:08

4 जनवरी 2035 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:14 – 08:32शुभ
रोग08:32 – 09:50टालें
उद्वेग09:50 – 11:08टालें
चर11:08 – 12:25सामान्य
लाभ12:25 – 13:43शुभ
अमृत13:43 – 15:01शुभ
काल15:01 – 16:19टालें
शुभ16:19 – 17:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:37 – 19:19शुभ
चर19:19 – 21:01सामान्य
रोग21:01 – 22:43टालें
काल22:43 – 00:26टालें
लाभ00:26 – 02:08शुभ
उद्वेग02:08 – 03:50टालें
शुभ03:50 – 05:32शुभ
अमृत05:32 – 07:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1408:06दिन
मंगल08:0608:58दिन
सूर्य08:5809:50दिन
शुक्र09:5010:42दिन
बुध10:4211:34दिन
चंद्र11:3412:25दिन
शनि12:2513:17दिन
गुरु13:1714:09दिन
मंगल14:0915:01दिन
सूर्य15:0115:53दिन
शुक्र15:5316:45दिन
बुध16:4517:37दिन
चंद्र17:3718:45रात
शनि18:4519:53रात
गुरु19:5321:01रात
मंगल21:0122:09रात
सूर्य22:0923:17रात
शुक्र23:1700:26रात
बुध00:2601:34रात
चंद्र01:3402:42रात
शनि02:4203:50रात
गुरु03:5004:58रात
मंगल04:5806:06रात
सूर्य06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2035कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 जन॰ 2035प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 जन॰ 2035पौष अमावस्याअमावस्या
13 जन॰ 2035विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2035मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
20 जन॰ 2035शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 जन॰ 2035प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 जन॰ 2035पौष पूर्णिमापूर्णिमा
27 जन॰ 2035संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 जन॰ 2035कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3461° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।