14 जनवरी 2036 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 14 जनवरी 2036, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 जनवरी 2036 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (12:59 तक), नक्षत्र पुष्य (21:25 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 08:33 से 09:52 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 17:45
रात 07:14 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:59 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पुष्य, 21:25 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जनवरी 2036 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 12:59 तक
कृष्ण द्वितीया 09:26, 15 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 21:25 तक
आश्लेषा 18:46, 15 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 16:56 तक
प्रीति 12:50, 15 जन॰ तक
करण
कौलव 12:59 तक
तैतिल 23:10 तक
गर 09:26, 15 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
18:56
चंद्रास्त
07:43
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2092
शक संवत
1957, राक्षस संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 09:52
यमगंड
11:11 – 12:30
गुलिक काल
13:48 – 15:07

14 जनवरी 2036 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:15 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:52टालें
शुभ09:52 – 11:11शुभ
रोग11:11 – 12:30टालें
उद्वेग12:30 – 13:48टालें
चर13:48 – 15:07सामान्य
लाभ15:07 – 16:26शुभ
अमृत16:26 – 17:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:45 – 19:26सामान्य
रोग19:26 – 21:07टालें
काल21:07 – 22:48टालें
लाभ22:48 – 00:29शुभ
उद्वेग00:29 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 03:52शुभ
अमृत03:52 – 05:33शुभ
चर05:33 – 07:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1508:07दिन
शनि08:0709:00दिन
गुरु09:0009:52दिन
मंगल09:5210:45दिन
सूर्य10:4511:37दिन
शुक्र11:3712:30दिन
बुध12:3013:22दिन
चंद्र13:2214:15दिन
शनि14:1515:07दिन
गुरु15:0716:00दिन
मंगल16:0016:52दिन
सूर्य16:5217:45दिन
शुक्र17:4518:52रात
बुध18:5220:00रात
चंद्र20:0021:07रात
शनि21:0722:15रात
गुरु22:1523:22रात
मंगल23:2200:29रात
सूर्य00:2901:37रात
शुक्र01:3702:44रात
बुध02:4403:52रात
चंद्र03:5204:59रात
शनि04:5906:07रात
गुरु06:0707:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जन॰ 2036मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2036संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 जन॰ 2036कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 जन॰ 2036कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 जन॰ 2036प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 जन॰ 2036माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2036विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2036शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2036प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 फ़र॰ 2036माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3605° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।