27 जनवरी 2037 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 27 जनवरी 2037, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 27 जनवरी 2037 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (08:28 तक), नक्षत्र रोहिणी (02:20, 28 जन॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 07:11 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 15:15 से 16:35 तक है।

दिन और रात
दिन 07:11 – 17:56
रात 07:11 तक
तिथि
एकादशी, 07:05 तक
नक्षत्र
रोहिणी, 02:20 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जनवरी 2037 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 08:28 तक
शुक्ल एकादशी 07:05, 28 जन॰ तक
शुक्ल द्वादशी 04:59, 29 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 02:20, 28 जन॰ तक
मृगशिरा 01:02, 29 जन॰ तक
योग
ब्रह्म 20:02 तक
इंद्र 17:24, 28 जन॰ तक
करण
गर 08:28 तक
वणिज 19:53 तक
विष्टि (भद्रा) 07:05, 28 जन॰ तक
बव 18:07, 28 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:11
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
13:52
चंद्रास्त
02:44
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2093
शक संवत
1958, नल संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
15:15 – 16:35
यमगंड
09:52 – 11:13
गुलिक काल
12:34 – 13:54

27 जनवरी 2037 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:11 – 08:32टालें
उद्वेग08:32 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:13सामान्य
लाभ11:13 – 12:34शुभ
अमृत12:34 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:15टालें
शुभ15:15 – 16:35शुभ
रोग16:35 – 17:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:56 – 19:35टालें
लाभ19:35 – 21:15शुभ
उद्वेग21:15 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:33शुभ
अमृत00:33 – 02:13शुभ
चर02:13 – 03:52सामान्य
रोग03:52 – 05:31टालें
काल05:31 – 07:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:1108:05दिन
सूर्य08:0508:59दिन
शुक्र08:5909:52दिन
बुध09:5210:46दिन
चंद्र10:4611:40दिन
शनि11:4012:34दिन
गुरु12:3413:27दिन
मंगल13:2714:21दिन
सूर्य14:2115:15दिन
शुक्र15:1516:08दिन
बुध16:0817:02दिन
चंद्र17:0217:56दिन
शनि17:5619:02रात
गुरु19:0220:08रात
मंगल20:0821:15रात
सूर्य21:1522:21रात
शुक्र22:2123:27रात
बुध23:2700:33रात
चंद्र00:3301:40रात
शनि01:4002:46रात
गुरु02:4603:52रात
मंगल03:5204:58रात
सूर्य04:5806:04रात
शुक्र06:0407:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जन॰ 2037शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2037प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 जन॰ 2037माघ पूर्णिमापूर्णिमा
3 फ़र॰ 2037संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 फ़र॰ 2037कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 फ़र॰ 2037कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 फ़र॰ 2037प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2037कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2037फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
19 फ़र॰ 2037विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3750° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।