19 फ़रवरी 2038 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2038, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2038 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (21:39 तक), नक्षत्र आश्लेषा (10:41 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 11:10 से 12:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 18:14
रात 06:55 तक
तिथि
पूर्णिमा, 21:39 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आश्लेषा, 10:41 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 फ़रवरी 2038 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
पूर्णिमा 21:39 तक
कृष्ण प्रतिपदा 18:26, 20 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:21, 20 फ़र॰ तक
योग
शोभन 11:19 तक
अतिगंडअशुभ 07:36, 20 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:09 तक
बव 21:39 तक
बालव 08:04, 20 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 10:41 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
17:58
चंद्रास्त
06:43
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2094
शक संवत
1959, पिंगल संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
11:10 – 12:35
यमगंड
15:24 – 16:49
गुलिक काल
08:20 – 09:45

19 फ़रवरी 2038 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:56 – 08:20सामान्य
लाभ08:20 – 09:45शुभ
अमृत09:45 – 11:10शुभ
काल11:10 – 12:35टालें
शुभ12:35 – 13:59शुभ
रोग13:59 – 15:24टालें
उद्वेग15:24 – 16:49टालें
चर16:49 – 18:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:14 – 19:49टालें
काल19:49 – 21:24टालें
लाभ21:24 – 22:59शुभ
उद्वेग22:59 – 00:34टालें
शुभ00:34 – 02:09शुभ
अमृत02:09 – 03:44शुभ
चर03:44 – 05:20सामान्य
रोग05:20 – 06:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5607:52दिन
बुध07:5208:49दिन
चंद्र08:4909:45दिन
शनि09:4510:42दिन
गुरु10:4211:38दिन
मंगल11:3812:35दिन
सूर्य12:3513:31दिन
शुक्र13:3114:28दिन
बुध14:2815:24दिन
चंद्र15:2416:21दिन
शनि16:2117:17दिन
गुरु17:1718:14दिन
मंगल18:1419:17रात
सूर्य19:1720:20रात
शुक्र20:2021:24रात
बुध21:2422:27रात
चंद्र22:2723:31रात
शनि23:3100:34रात
गुरु00:3401:38रात
मंगल01:3802:41रात
सूर्य02:4103:44रात
शुक्र03:4404:48रात
बुध04:4805:51रात
चंद्र05:5106:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 फ़र॰ 2038माघ पूर्णिमापूर्णिमा
23 फ़र॰ 2038संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 फ़र॰ 2038कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 मार्च 2038कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 मार्च 2038प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 मार्च 2038फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
10 मार्च 2038विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2038मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2038शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 मार्च 2038प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3898° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।