14 फ़रवरी 2039 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 14 फ़रवरी 2039, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 फ़रवरी 2039 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (23:10 तक), नक्षत्र चित्रा (11:38 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:00 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 08:24 से 09:48 तक है।

दिन और रात
दिन 07:00 – 18:10
रात 06:59 तक
तिथि
षष्ठी, 23:10 तक
सप्तमी
नक्षत्र
चित्रा, 11:38 तक
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 फ़रवरी 2039 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 23:10 तक
कृष्ण सप्तमी 21:07, 15 फ़र॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 11:38 तक
स्वाति 10:15, 15 फ़र॰ तक
योग
गंडअशुभ 20:37 तक
वृद्धि 17:44, 15 फ़र॰ तक
करण
गर 12:13 तक
वणिज 23:10 तक
विष्टि (भद्रा) 10:08, 15 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
23:34
चंद्रास्त
10:26
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2095
शक संवत
1960, कालयुक्त संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:24 – 09:48
यमगंड
11:11 – 12:35
गुलिक काल
13:59 – 15:22

14 फ़रवरी 2039 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:00 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:48टालें
शुभ09:48 – 11:11शुभ
रोग11:11 – 12:35टालें
उद्वेग12:35 – 13:59टालें
चर13:59 – 15:22सामान्य
लाभ15:22 – 16:46शुभ
अमृत16:46 – 18:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:10 – 19:46सामान्य
रोग19:46 – 21:22टालें
काल21:22 – 22:58टालें
लाभ22:58 – 00:35शुभ
उद्वेग00:35 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 03:47शुभ
अमृत03:47 – 05:23शुभ
चर05:23 – 06:59सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0007:56दिन
शनि07:5608:52दिन
गुरु08:5209:48दिन
मंगल09:4810:43दिन
सूर्य10:4311:39दिन
शुक्र11:3912:35दिन
बुध12:3513:31दिन
चंद्र13:3114:27दिन
शनि14:2715:22दिन
गुरु15:2216:18दिन
मंगल16:1817:14दिन
सूर्य17:1418:10दिन
शुक्र18:1019:14रात
बुध19:1420:18रात
चंद्र20:1821:22रात
शनि21:2222:26रात
गुरु22:2623:30रात
मंगल23:3000:35रात
सूर्य00:3501:39रात
शुक्र01:3902:43रात
बुध02:4303:47रात
चंद्र03:4704:51रात
शनि04:5105:55रात
गुरु05:5506:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 फ़र॰ 2039कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
19 फ़र॰ 2039कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 फ़र॰ 2039प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 फ़र॰ 2039फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
27 फ़र॰ 2039विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 मार्च 2039शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 मार्च 2039प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 मार्च 2039फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2039संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 मार्च 2039मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4036° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।