17 सितंबर 2040 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 17 सितंबर 2040, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 सितंबर 2040 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (11:09 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (07:00 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 07:39 से 09:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 18:23
रात 06:07 तक
तिथि
एकादशी, 11:09 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 04:46 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 सितंबर 2040 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 11:09 तक
शुक्ल द्वादशी 08:06, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 04:46, 18 सित॰ तक
धनिष्ठा 02:27, 19 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 21:47 तक
सुकर्मा 18:08, 18 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:09 तक
बव 21:38 तक
बालव 08:06, 18 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
16:21
चंद्रास्त
01:56
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2097
शक संवत
1962, रौद्र संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
07:39 – 09:11
यमगंड
10:43 – 12:15
गुलिक काल
13:47 – 15:19

17 सितंबर 2040 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:07 – 07:39शुभ
काल07:39 – 09:11टालें
शुभ09:11 – 10:43शुभ
रोग10:43 – 12:15टालें
उद्वेग12:15 – 13:47टालें
चर13:47 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 16:51शुभ
अमृत16:51 – 18:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:23 – 19:51सामान्य
रोग19:51 – 21:19टालें
काल21:19 – 22:47टालें
लाभ22:47 – 00:15शुभ
उद्वेग00:15 – 01:43टालें
शुभ01:43 – 03:11शुभ
अमृत03:11 – 04:39शुभ
चर04:39 – 06:07सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0707:08दिन
शनि07:0808:09दिन
गुरु08:0909:11दिन
मंगल09:1110:12दिन
सूर्य10:1211:13दिन
शुक्र11:1312:15दिन
बुध12:1513:16दिन
चंद्र13:1614:17दिन
शनि14:1715:19दिन
गुरु15:1916:20दिन
मंगल16:2017:21दिन
सूर्य17:2118:23दिन
शुक्र18:2319:22रात
बुध19:2220:20रात
चंद्र20:2021:19रात
शनि21:1922:18रात
गुरु22:1823:16रात
मंगल23:1600:15रात
सूर्य00:1501:14रात
शुक्र01:1402:12रात
बुध02:1203:11रात
चंद्र03:1104:10रात
शनि04:1005:09रात
गुरु05:0906:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2040शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 सित॰ 2040प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 सित॰ 2040भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
24 सित॰ 2040संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 सित॰ 2040कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 अक्टू॰ 2040कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अक्टू॰ 2040प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2040आश्विन अमावस्याअमावस्या
10 अक्टू॰ 2040विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अक्टू॰ 2040शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4258° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।