22 अक्टूबर 2041 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2041, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2041 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (03:14, 23 अक्टू॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (00:23, 23 अक्टू॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 17:44 पर है। राहुकाल 14:54 से 16:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 17:44
रात 06:27 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:14 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 00:23 तक
हस्त
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2041 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:14, 23 अक्टू॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 05:18, 24 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 00:23, 23 अक्टू॰ तक
हस्त 02:59, 24 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 02:54, 23 अक्टू॰ तक
वैधृतिअशुभ 03:27, 24 अक्टू॰ तक
करण
गर 14:05 तक
वणिज 03:14, 23 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:19, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
17:44
चंद्रोदय
03:50
चंद्रास्त
16:28
दिनमान
11h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2098
शक संवत
1963, दुर्मति संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
14:54 – 16:19
यमगंड
09:15 – 10:40
गुलिक काल
12:05 – 13:30

22 अक्टूबर 2041 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:26 – 07:51टालें
उद्वेग07:51 – 09:15टालें
चर09:15 – 10:40सामान्य
लाभ10:40 – 12:05शुभ
अमृत12:05 – 13:30शुभ
काल13:30 – 14:54टालें
शुभ14:54 – 16:19शुभ
रोग16:19 – 17:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:44 – 19:19टालें
लाभ19:19 – 20:55शुभ
उद्वेग20:55 – 22:30टालें
शुभ22:30 – 00:05शुभ
अमृत00:05 – 01:41शुभ
चर01:41 – 03:16सामान्य
रोग03:16 – 04:51टालें
काल04:51 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2607:22दिन
सूर्य07:2208:19दिन
शुक्र08:1909:15दिन
बुध09:1510:12दिन
चंद्र10:1211:08दिन
शनि11:0812:05दिन
गुरु12:0513:01दिन
मंगल13:0113:58दिन
सूर्य13:5814:54दिन
शुक्र14:5415:51दिन
बुध15:5116:47दिन
चंद्र16:4717:44दिन
शनि17:4418:48रात
गुरु18:4819:51रात
मंगल19:5120:55रात
सूर्य20:5521:58रात
शुक्र21:5823:02रात
बुध23:0200:05रात
चंद्र00:0501:09रात
शनि01:0902:12रात
गुरु02:1203:16रात
मंगल03:1604:19रात
सूर्य04:1905:23रात
शुक्र05:2306:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2041प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अक्टू॰ 2041कार्तिक अमावस्याअमावस्या
29 अक्टू॰ 2041विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2041शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2041प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2041कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
11 नव॰ 2041संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2041कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2041वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2041कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4411° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।