23 अक्टूबर 2041 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 23 अक्टूबर 2041, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 23 अक्टूबर 2041 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (05:18, 24 अक्टू॰ तक), नक्षत्र हस्त (02:59, 24 अक्टू॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:43 पर है। राहुकाल 12:05 से 13:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:43
रात 06:27 तक
तिथि
चतुर्दशी, 05:18 तक
नक्षत्र
हस्त, 02:59 तक
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2041 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 05:18, 24 अक्टू॰ तक
अमावस्या 07:00, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 02:59, 24 अक्टू॰ तक
चित्रा 05:13, 25 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 03:27, 24 अक्टू॰ तक
विष्कंभअशुभ 03:43, 25 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:19 तक
शकुनि 05:18, 24 अक्टू॰ तक
चतुष्पद 18:12, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:43
चंद्रोदय
04:43
चंद्रास्त
16:55
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2098
शक संवत
1963, दुर्मति संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:05 – 13:29
यमगंड
07:51 – 09:16
गुलिक काल
10:40 – 12:05

23 अक्टूबर 2041 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:27 – 07:51शुभ
अमृत07:51 – 09:16शुभ
काल09:16 – 10:40टालें
शुभ10:40 – 12:05शुभ
रोग12:05 – 13:29टालें
उद्वेग13:29 – 14:54टालें
चर14:54 – 16:18सामान्य
लाभ16:18 – 17:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:43 – 19:19टालें
शुभ19:19 – 20:54शुभ
अमृत20:54 – 22:30शुभ
चर22:30 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:41टालें
काल01:41 – 03:16टालें
लाभ03:16 – 04:52शुभ
उद्वेग04:52 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2707:23दिन
चंद्र07:2308:19दिन
शनि08:1909:16दिन
गुरु09:1610:12दिन
मंगल10:1211:08दिन
सूर्य11:0812:05दिन
शुक्र12:0513:01दिन
बुध13:0113:58दिन
चंद्र13:5814:54दिन
शनि14:5415:50दिन
गुरु15:5016:47दिन
मंगल16:4717:43दिन
सूर्य17:4318:47रात
शुक्र18:4719:50रात
बुध19:5020:54रात
चंद्र20:5421:58रात
शनि21:5823:01रात
गुरु23:0100:05रात
मंगल00:0501:09रात
सूर्य01:0902:12रात
शुक्र02:1203:16रात
बुध03:1604:20रात
चंद्र04:2005:24रात
शनि05:2406:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अक्टू॰ 2041कार्तिक अमावस्याअमावस्या
29 अक्टू॰ 2041विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 नव॰ 2041शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 नव॰ 2041प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 नव॰ 2041कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
11 नव॰ 2041संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2041कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2041वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2041कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 नव॰ 2041प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4411° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।