23 नवंबर 2041 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 23 नवंबर 2041, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 23 नवंबर 2041 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (23:06 तक), नक्षत्र विशाखा (15:37 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 09:28 से 10:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 17:24
रात 06:50 तक
तिथि
अमावस्या, 23:06 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
विशाखा, 15:37 तक
अनुराधा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 नवंबर 2041 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 23:06 तक
शुक्ल प्रतिपदा 22:55, 24 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 15:37 तक
अनुराधा 16:11, 24 नव॰ तक
योग
शोभन 09:12 तक
अतिगंडअशुभ 08:07, 24 नव॰ तक
करण
चतुष्पद 11:00 तक
नाग 23:06 तक
किंस्तुघ्न 11:04, 24 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 09:24 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
06:17
चंद्रास्त
17:02
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2098
शक संवत
1963, दुर्मति संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:56
अभिजीत मुहूर्त
11:46 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
09:28 – 10:48
यमगंड
13:26 – 14:46
गुलिक काल
06:50 – 08:09

23 नवंबर 2041 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:50 – 08:09टालें
शुभ08:09 – 09:28शुभ
रोग09:28 – 10:48टालें
उद्वेग10:48 – 12:07टालें
चर12:07 – 13:26सामान्य
लाभ13:26 – 14:46शुभ
अमृत14:46 – 16:05शुभ
काल16:05 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:24 – 19:05शुभ
उद्वेग19:05 – 20:46टालें
शुभ20:46 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 00:07शुभ
चर00:07 – 01:48सामान्य
रोग01:48 – 03:29टालें
काल03:29 – 05:10टालें
लाभ05:10 – 06:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5007:43दिन
गुरु07:4308:35दिन
मंगल08:3509:28दिन
सूर्य09:2810:21दिन
शुक्र10:2111:14दिन
बुध11:1412:07दिन
चंद्र12:0713:00दिन
शनि13:0013:53दिन
गुरु13:5314:46दिन
मंगल14:4615:39दिन
सूर्य15:3916:31दिन
शुक्र16:3117:24दिन
बुध17:2418:31रात
चंद्र18:3119:39रात
शनि19:3920:46रात
गुरु20:4621:53रात
मंगल21:5323:00रात
सूर्य23:0000:07रात
शुक्र00:0701:15रात
बुध01:1502:22रात
चंद्र02:2203:29रात
शनि03:2904:36रात
गुरु04:3605:43रात
मंगल05:4306:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 नव॰ 2041मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
27 नव॰ 2041विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 दिस॰ 2041शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 दिस॰ 2041प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 दिस॰ 2041मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
11 दिस॰ 2041संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 दिस॰ 2041कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 दिस॰ 2041धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिस॰ 2041कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 दिस॰ 2041प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4423° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।