22 अगस्त 2042 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 22 अगस्त 2042, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 22 अगस्त 2042 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (12:13 तक), नक्षत्र स्वाति (18:32 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:53
रात 05:54 तक
तिथि
षष्ठी, 12:13 तक
सप्तमी
नक्षत्र
स्वाति, 18:32 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2042 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 12:13 तक
शुक्ल सप्तमी 14:29, 23 अग॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 18:32 तक
विशाखा 21:14, 23 अग॰ तक
योग
शुक्ल 08:55 तक
ब्रह्म 09:47, 23 अग॰ तक
करण
तैतिल 12:13 तक
गर 01:24, 23 अग॰ तक
वणिज 14:29, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
11:28
चंद्रास्त
22:25
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:23
यमगंड
15:38 – 17:16
गुलिक काल
07:31 – 09:09

22 अगस्त 2042 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:31सामान्य
लाभ07:31 – 09:09शुभ
अमृत09:09 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:23टालें
शुभ12:23 – 14:01शुभ
रोग14:01 – 15:38टालें
उद्वेग15:38 – 17:16टालें
चर17:16 – 18:53सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:53 – 20:16टालें
काल20:16 – 21:38टालें
लाभ21:38 – 23:01शुभ
उद्वेग23:01 – 00:24टालें
शुभ00:24 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:09शुभ
चर03:09 – 04:32सामान्य
रोग04:32 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:59दिन
बुध06:5908:04दिन
चंद्र08:0409:09दिन
शनि09:0910:13दिन
गुरु10:1311:18दिन
मंगल11:1812:23दिन
सूर्य12:2313:28दिन
शुक्र13:2814:33दिन
बुध14:3315:38दिन
चंद्र15:3816:43दिन
शनि16:4317:48दिन
गुरु17:4818:53दिन
मंगल18:5319:48रात
सूर्य19:4820:43रात
शुक्र20:4321:38रात
बुध21:3822:33रात
चंद्र22:3323:29रात
शनि23:2900:24रात
गुरु00:2401:19रात
मंगल01:1902:14रात
सूर्य02:1403:09रात
शुक्र03:0904:04रात
बुध04:0404:59रात
चंद्र04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अग॰ 2042शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अग॰ 2042प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 अग॰ 2042श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
3 सित॰ 2042संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 सित॰ 2042कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 सित॰ 2042कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 सित॰ 2042प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 सित॰ 2042भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
17 सित॰ 2042कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2042विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4527° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।