18 सितंबर 2042 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 18 सितंबर 2042, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 सितंबर 2042 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (00:29, 19 सित॰ तक), नक्षत्र स्वाति (01:24, 19 सित॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 13:47 से 15:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 18:22
रात 06:08 तक
तिथि
चतुर्थी, 00:29 तक
पंचमी
नक्षत्र
स्वाति, 01:24 तक
विशाखा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2042 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 00:29, 19 सित॰ तक
शुक्ल पंचमी 02:55, 20 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 01:24, 19 सित॰ तक
विशाखा 04:21, 20 सित॰ तक
योग
इंद्र 16:10 तक
वैधृतिअशुभ 17:09, 19 सित॰ तक
करण
वणिज 11:11 तक
विष्टि (भद्रा) 00:29, 19 सित॰ तक
बव 13:45, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
09:21
चंद्रास्त
20:25
दिनमान
12h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:47 – 15:18
यमगंड
06:07 – 07:39
गुलिक काल
09:11 – 10:43

18 सितंबर 2042 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:07 – 07:39शुभ
रोग07:39 – 09:11टालें
उद्वेग09:11 – 10:43टालें
चर10:43 – 12:15सामान्य
लाभ12:15 – 13:47शुभ
अमृत13:47 – 15:18शुभ
काल15:18 – 16:50टालें
शुभ16:50 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:22 – 19:50शुभ
चर19:50 – 21:19सामान्य
रोग21:19 – 22:47टालें
काल22:47 – 00:15टालें
लाभ00:15 – 01:43शुभ
उद्वेग01:43 – 03:11टालें
शुभ03:11 – 04:39शुभ
अमृत04:39 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0707:08दिन
मंगल07:0808:10दिन
सूर्य08:1009:11दिन
शुक्र09:1110:12दिन
बुध10:1211:13दिन
चंद्र11:1312:15दिन
शनि12:1513:16दिन
गुरु13:1614:17दिन
मंगल14:1715:18दिन
सूर्य15:1816:20दिन
शुक्र16:2017:21दिन
बुध17:2118:22दिन
चंद्र18:2219:21रात
शनि19:2120:20रात
गुरु20:2021:19रात
मंगल21:1922:17रात
सूर्य22:1723:16रात
शुक्र23:1600:15रात
बुध00:1501:14रात
चंद्र01:1402:12रात
शनि02:1203:11रात
गुरु03:1104:10रात
मंगल04:1005:09रात
सूर्य05:0906:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 सित॰ 2042विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 सित॰ 2042शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 सित॰ 2042प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 सित॰ 2042भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
2 अक्टू॰ 2042संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अक्टू॰ 2042कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अक्टू॰ 2042कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 अक्टू॰ 2042प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 अक्टू॰ 2042आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2042तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4537° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।