23 फ़रवरी 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 23 फ़रवरी 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (03:27, 24 फ़र॰ तक), नक्षत्र आश्लेषा (07:25 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 08:18 से 09:43 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 18:16
रात 06:51 तक
तिथि
पूर्णिमा, 03:27 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 फ़रवरी 2043 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 03:27, 24 फ़र॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 04:18, 25 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 08:24, 24 फ़र॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:58, 24 फ़र॰ तक
सुकर्मा 00:25, 25 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:14 तक
बव 03:27, 24 फ़र॰ तक
बालव 15:48, 24 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 07:25 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
17:49
चंद्रास्त
06:38
दिनमान
11h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
08:18 – 09:43
यमगंड
11:09 – 12:34
गुलिक काल
14:00 – 15:25

23 फ़रवरी 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:52 – 08:18शुभ
काल08:18 – 09:43टालें
शुभ09:43 – 11:09शुभ
रोग11:09 – 12:34टालें
उद्वेग12:34 – 14:00टालें
चर14:00 – 15:25सामान्य
लाभ15:25 – 16:51शुभ
अमृत16:51 – 18:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:16 – 19:51सामान्य
रोग19:51 – 21:25टालें
काल21:25 – 22:59टालें
लाभ22:59 – 00:34शुभ
उद्वेग00:34 – 02:08टालें
शुभ02:08 – 03:42शुभ
अमृत03:42 – 05:17शुभ
चर05:17 – 06:51सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5207:49दिन
शनि07:4908:46दिन
गुरु08:4609:43दिन
मंगल09:4310:40दिन
सूर्य10:4011:37दिन
शुक्र11:3712:34दिन
बुध12:3413:31दिन
चंद्र13:3114:28दिन
शनि14:2815:25दिन
गुरु15:2516:22दिन
मंगल16:2217:19दिन
सूर्य17:1918:16दिन
शुक्र18:1619:19रात
बुध19:1920:22रात
चंद्र20:2221:25रात
शनि21:2522:28रात
गुरु22:2823:31रात
मंगल23:3100:34रात
सूर्य00:3401:37रात
शुक्र01:3702:40रात
बुध02:4003:42रात
चंद्र03:4204:45रात
शनि04:4505:48रात
गुरु05:4806:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 फ़र॰ 2043माघ पूर्णिमापूर्णिमा
28 फ़र॰ 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 मार्च 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 मार्च 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 मार्च 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 मार्च 2043फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
14 मार्च 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2043मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
21 मार्च 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 मार्च 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4598° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।