7 जून 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 7 जून 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 जून 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:05 तक), नक्षत्र रोहिणी (17:58 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 19:17 पर है। राहुकाल 17:32 से 19:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 19:17
रात 05:22 तक
तिथि
अमावस्या, 16:05 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रोहिणी, 17:58 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 जून 2043 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 16:05 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:31, 8 जून तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:58 तक
मृगशिरा 15:15, 8 जून तक
योग
धृति 19:38 तक
शूलअशुभ 15:39, 8 जून तक
करण
चतुष्पद 05:56 तक
नाग 16:05 तक
किंस्तुघ्न 02:16, 8 जून तक
बव 12:31, 8 जून तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:34, 8 जून तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
19:17
चंद्रोदय
04:46
चंद्रास्त
19:32
दिनमान
13h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:32 – 19:17
यमगंड
12:20 – 14:04
गुलिक काल
15:48 – 17:32

7 जून 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:22 – 07:07टालें
चर07:07 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:35शुभ
अमृत10:35 – 12:20शुभ
काल12:20 – 14:04टालें
शुभ14:04 – 15:48शुभ
रोग15:48 – 17:32टालें
उद्वेग17:32 – 19:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:17 – 20:32शुभ
अमृत20:32 – 21:48शुभ
चर21:48 – 23:04सामान्य
रोग23:04 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:35टालें
लाभ01:35 – 02:51शुभ
उद्वेग02:51 – 04:07टालें
शुभ04:07 – 05:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2206:32दिन
शुक्र06:3207:42दिन
बुध07:4208:51दिन
चंद्र08:5110:01दिन
शनि10:0111:10दिन
गुरु11:1012:20दिन
मंगल12:2013:29दिन
सूर्य13:2914:39दिन
शुक्र14:3915:48दिन
बुध15:4816:58दिन
चंद्र16:5818:07दिन
शनि18:0719:17दिन
गुरु19:1720:07रात
मंगल20:0720:58रात
सूर्य20:5821:48रात
शुक्र21:4822:39रात
बुध22:3923:29रात
चंद्र23:2900:20रात
शनि00:2001:10रात
गुरु01:1002:01रात
मंगल02:0102:51रात
सूर्य02:5103:41रात
शुक्र03:4104:32रात
बुध04:3205:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जून 2043ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
10 जून 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 जून 2043मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जून 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जून 2043ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
26 जून 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जून 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जुल॰ 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जुल॰ 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 जुल॰ 2043आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4638° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।