1 सितंबर 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 1 सितंबर 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 1 सितंबर 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (20:15 तक), नक्षत्र पुष्य (13:18 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 15:32 से 17:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 18:43
रात 05:59 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:15 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुष्य, 13:18 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2043 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 20:15 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:17, 2 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 13:18 तक
आश्लेषा 12:56, 2 सित॰ तक
योग
वरीयान 11:40 तक
परिघअशुभ 09:42, 2 सित॰ तक
करण
गर 08:53 तक
वणिज 20:15 तक
विष्टि (भद्रा) 07:42, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
03:24
चंद्रास्त
17:33
दिनमान
12h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
15:32 – 17:07
यमगंड
09:10 – 10:45
गुलिक काल
12:21 – 13:56

1 सितंबर 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:59 – 07:34टालें
उद्वेग07:34 – 09:10टालें
चर09:10 – 10:45सामान्य
लाभ10:45 – 12:21शुभ
अमृत12:21 – 13:56शुभ
काल13:56 – 15:32टालें
शुभ15:32 – 17:07शुभ
रोग17:07 – 18:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:43 – 20:07टालें
लाभ20:07 – 21:32शुभ
उद्वेग21:32 – 22:56टालें
शुभ22:56 – 00:21शुभ
अमृत00:21 – 01:45शुभ
चर01:45 – 03:10सामान्य
रोग03:10 – 04:35टालें
काल04:35 – 05:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5907:02दिन
सूर्य07:0208:06दिन
शुक्र08:0609:10दिन
बुध09:1010:13दिन
चंद्र10:1311:17दिन
शनि11:1712:21दिन
गुरु12:2113:24दिन
मंगल13:2414:28दिन
सूर्य14:2815:32दिन
शुक्र15:3216:35दिन
बुध16:3517:39दिन
चंद्र17:3918:43दिन
शनि18:4319:39रात
गुरु19:3920:35रात
मंगल20:3521:32रात
सूर्य21:3222:28रात
शुक्र22:2823:24रात
बुध23:2400:21रात
चंद्र00:2101:17रात
शनि01:1702:14रात
गुरु02:1403:10रात
मंगल03:1004:06रात
सूर्य04:0605:03रात
शुक्र05:0305:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 सित॰ 2043भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
7 सित॰ 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 सित॰ 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 सित॰ 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 सित॰ 2043कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2043भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
22 सित॰ 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 सित॰ 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 सित॰ 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4671° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।