6 सितंबर 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 6 सितंबर 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 6 सितंबर 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (20:39 तक), नक्षत्र हस्त (16:29 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 17:02 से 18:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:37
रात 06:02 तक
तिथि
तृतीया, 20:39 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
हस्त, 16:29 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 सितंबर 2043 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 20:39 तक
शुक्ल चतुर्थी 22:22, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 16:29 तक
चित्रा 18:43, 7 सित॰ तक
योग
शुक्ल 05:51, 7 सित॰ तक
ब्रह्म 06:20, 8 सित॰ तक
करण
तैतिल 07:59 तक
गर 20:39 तक
वणिज 09:27, 7 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 05:32, 7 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
08:23
चंद्रास्त
20:07
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
17:02 – 18:37
यमगंड
12:19 – 13:53
गुलिक काल
15:28 – 17:02

6 सितंबर 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:01 – 07:36टालें
चर07:36 – 09:10सामान्य
लाभ09:10 – 10:44शुभ
अमृत10:44 – 12:19शुभ
काल12:19 – 13:53टालें
शुभ13:53 – 15:28शुभ
रोग15:28 – 17:02टालें
उद्वेग17:02 – 18:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:37 – 20:02शुभ
अमृत20:02 – 21:28शुभ
चर21:28 – 22:54सामान्य
रोग22:54 – 00:19टालें
काल00:19 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:10शुभ
उद्वेग03:10 – 04:36टालें
शुभ04:36 – 06:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0107:04दिन
शुक्र07:0408:07दिन
बुध08:0709:10दिन
चंद्र09:1010:13दिन
शनि10:1311:16दिन
गुरु11:1612:19दिन
मंगल12:1913:22दिन
सूर्य13:2214:25दिन
शुक्र14:2515:28दिन
बुध15:2816:31दिन
चंद्र16:3117:34दिन
शनि17:3418:37दिन
गुरु18:3719:34रात
मंगल19:3420:31रात
सूर्य20:3121:28रात
शुक्र21:2822:25रात
बुध22:2523:22रात
चंद्र23:2200:19रात
शनि00:1901:16रात
गुरु01:1602:13रात
मंगल02:1303:10रात
सूर्य03:1004:07रात
शुक्र04:0705:04रात
बुध05:0406:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 सित॰ 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 सित॰ 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 सित॰ 2043कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2043भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
22 सित॰ 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 सित॰ 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 सित॰ 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 अक्टू॰ 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2043आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4672° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।