20 जनवरी 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 20 जनवरी 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (15:12 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (04:10, 21 जन॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 11:12 से 12:32 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:50
रात 07:13 तक
तिथि
द्वितीया, 15:12 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 04:10 तक
शतभिषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2045 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 15:12 तक
शुक्ल तृतीया 17:37, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 04:10, 21 जन॰ तक
शतभिषा 06:53, 22 जन॰ तक
योग
सिद्धि 09:19 तक
व्यतीपातअशुभ 10:06, 21 जन॰ तक
करण
कौलव 15:12 तक
तैतिल 04:27, 21 जन॰ तक
गर 17:37, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 14:42 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
08:32
चंद्रास्त
19:47
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
11:12 – 12:32
यमगंड
15:11 – 16:31
गुलिक काल
08:33 – 09:53

20 जनवरी 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:13 – 08:33सामान्य
लाभ08:33 – 09:53शुभ
अमृत09:53 – 11:12शुभ
काल11:12 – 12:32टालें
शुभ12:32 – 13:51शुभ
रोग13:51 – 15:11टालें
उद्वेग15:11 – 16:31टालें
चर16:31 – 17:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:50 – 19:31टालें
काल19:31 – 21:11टालें
लाभ21:11 – 22:51शुभ
उद्वेग22:51 – 00:32टालें
शुभ00:32 – 02:12शुभ
अमृत02:12 – 03:52शुभ
चर03:52 – 05:33सामान्य
रोग05:33 – 07:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1308:07दिन
बुध08:0709:00दिन
चंद्र09:0009:53दिन
शनि09:5310:46दिन
गुरु10:4611:39दिन
मंगल11:3912:32दिन
सूर्य12:3213:25दिन
शुक्र13:2514:18दिन
बुध14:1815:11दिन
चंद्र15:1116:04दिन
शनि16:0416:57दिन
गुरु16:5717:50दिन
मंगल17:5018:57रात
सूर्य18:5720:04रात
शुक्र20:0421:11रात
बुध21:1122:18रात
चंद्र22:1823:25रात
शनि23:2500:32रात
गुरु00:3201:39रात
मंगल01:3902:46रात
सूर्य02:4603:52रात
शुक्र03:5204:59रात
बुध04:5906:06रात
चंद्र06:0607:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2045माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 फ़र॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2045कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 फ़र॰ 2045फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4865° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।