21 सितंबर 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 21 सितंबर 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 21 सितंबर 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (02:25, 22 सित॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (12:37 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 13:45 से 15:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:18
रात 06:09 तक
तिथि
एकादशी, 02:25 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 12:37 तक
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 सितंबर 2045 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 02:25, 22 सित॰ तक
शुक्ल द्वादशी 05:03, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 15:45, 22 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 23:28 तक
सुकर्मा 00:32, 23 सित॰ तक
करण
वणिज 13:06 तक
विष्टि (भद्रा) 02:25, 22 सित॰ तक
बव 15:44, 22 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
15:40
चंद्रास्त
01:34
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2102
शक संवत
1967, क्रोधन संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:45 – 15:16
यमगंड
06:09 – 07:40
गुलिक काल
09:11 – 10:42

21 सितंबर 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:09 – 07:40शुभ
रोग07:40 – 09:11टालें
उद्वेग09:11 – 10:42टालें
चर10:42 – 12:13सामान्य
लाभ12:13 – 13:45शुभ
अमृत13:45 – 15:16शुभ
काल15:16 – 16:47टालें
शुभ16:47 – 18:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:18 – 19:47शुभ
चर19:47 – 21:16सामान्य
रोग21:16 – 22:45टालें
काल22:45 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:43शुभ
उद्वेग01:43 – 03:11टालें
शुभ03:11 – 04:40शुभ
अमृत04:40 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0907:09दिन
मंगल07:0908:10दिन
सूर्य08:1009:11दिन
शुक्र09:1110:12दिन
बुध10:1211:13दिन
चंद्र11:1312:13दिन
शनि12:1313:14दिन
गुरु13:1414:15दिन
मंगल14:1515:16दिन
सूर्य15:1616:17दिन
शुक्र16:1717:17दिन
बुध17:1718:18दिन
चंद्र18:1819:18रात
शनि19:1820:17रात
गुरु20:1721:16रात
मंगल21:1622:15रात
सूर्य22:1523:14रात
शुक्र23:1400:14रात
बुध00:1401:13रात
चंद्र01:1302:12रात
शनि02:1203:11रात
गुरु03:1104:11रात
मंगल04:1105:10रात
सूर्य05:1006:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 सित॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 सित॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2045भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2045आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2045तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4958° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।