21 दिसंबर 2046 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2046, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2046 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:10 तक), नक्षत्र हस्त (04:16, 22 दिस॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 11:01 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 17:28
रात 07:09 तक
तिथि
नवमी, 04:57 तक
दशमी
नक्षत्र
हस्त, 04:16 तक
चित्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 दिसंबर 2046 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:10 तक
कृष्ण नवमी 04:57, 22 दिस॰ तक
कृष्ण दशमी 02:36, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 04:16, 22 दिस॰ तक
चित्रा 02:37, 23 दिस॰ तक
योग
सौभाग्य 19:18 तक
शोभन 16:13, 22 दिस॰ तक
करण
कौलव 07:10 तक
तैतिल 18:05 तक
गर 04:57, 22 दिस॰ तक
वणिज 15:47, 22 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
00:32
चंद्रास्त
12:25
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2103
शक संवत
1968, अक्षय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:19 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
11:01 – 12:19
यमगंड
14:53 – 16:11
गुलिक काल
08:26 – 09:44

21 दिसंबर 2046 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:09 – 08:26सामान्य
लाभ08:26 – 09:44शुभ
अमृत09:44 – 11:01शुभ
काल11:01 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 13:36शुभ
रोग13:36 – 14:53टालें
उद्वेग14:53 – 16:11टालें
चर16:11 – 17:28सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:28 – 19:11टालें
काल19:11 – 20:54टालें
लाभ20:54 – 22:36शुभ
उद्वेग22:36 – 00:19टालें
शुभ00:19 – 02:02शुभ
अमृत02:02 – 03:44शुभ
चर03:44 – 05:27सामान्य
रोग05:27 – 07:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0908:01दिन
बुध08:0108:52दिन
चंद्र08:5209:44दिन
शनि09:4410:35दिन
गुरु10:3511:27दिन
मंगल11:2712:19दिन
सूर्य12:1913:10दिन
शुक्र13:1014:02दिन
बुध14:0214:53दिन
चंद्र14:5315:45दिन
शनि15:4516:37दिन
गुरु16:3717:28दिन
मंगल17:2818:37रात
सूर्य18:3719:45रात
शुक्र19:4520:54रात
बुध20:5422:02रात
चंद्र22:0223:10रात
शनि23:1000:19रात
गुरु00:1901:27रात
मंगल01:2702:36रात
सूर्य02:3603:44रात
शुक्र03:4404:53रात
बुध04:5306:01रात
चंद्र06:0107:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 दिस॰ 2046कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2046कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2046प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2046पौष अमावस्याअमावस्या
31 दिस॰ 2046विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 जन॰ 2047शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2047प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जन॰ 2047पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2047संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2047मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2047कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5132° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।