4 मई 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 4 मई 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 4 मई 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (02:49, 5 मई तक), नक्षत्र हस्त (21:35 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 12:18 से 13:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 18:58
रात 05:37 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:49 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
हस्त, 21:35 तक
चित्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 मई 2050 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 02:49, 5 मई तक
शुक्ल चतुर्दशी 03:38, 6 मई तक
नक्षत्र
हस्त 21:35 तक
चित्रा 23:08, 5 मई तक
योग
हर्षण 09:52 तक
वज्रअशुभ 09:48, 5 मई तक
करण
कौलव 14:13 तक
तैतिल 02:49, 5 मई तक
गर 15:18, 5 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
16:42
चंद्रास्त
03:44
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:18 – 13:58
यमगंड
07:18 – 08:58
गुलिक काल
10:38 – 12:18

4 मई 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:38 – 07:18शुभ
अमृत07:18 – 08:58शुभ
काल08:58 – 10:38टालें
शुभ10:38 – 12:18शुभ
रोग12:18 – 13:58टालें
उद्वेग13:58 – 15:38टालें
चर15:38 – 17:18सामान्य
लाभ17:18 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:58 – 20:18टालें
शुभ20:18 – 21:37शुभ
अमृत21:37 – 22:57शुभ
चर22:57 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 01:37टालें
काल01:37 – 02:57टालें
लाभ02:57 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3806:44दिन
चंद्र06:4407:51दिन
शनि07:5108:58दिन
गुरु08:5810:04दिन
मंगल10:0411:11दिन
सूर्य11:1112:18दिन
शुक्र12:1813:24दिन
बुध13:2414:31दिन
चंद्र14:3115:38दिन
शनि15:3816:44दिन
गुरु16:4417:51दिन
मंगल17:5118:58दिन
सूर्य18:5819:51रात
शुक्र19:5120:44रात
बुध20:4421:37रात
चंद्र21:3722:31रात
शनि22:3123:24रात
गुरु23:2400:17रात
मंगल00:1701:11रात
सूर्य01:1102:04रात
शुक्र02:0402:57रात
बुध02:5703:50रात
चंद्र03:5004:44रात
शनि04:4405:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 मई 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 मई 2050वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
10 मई 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मई 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मई 2050वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 मई 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 मई 2050ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
24 मई 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 जून 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5603° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।