2 जून 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 2 जून 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 2 जून 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (16:59 तक), नक्षत्र चित्रा (07:41 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:15
रात 05:23 तक
तिथि
द्वादशी, 16:59 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
स्वाति
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जून 2050 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 16:59 तक
शुक्ल त्रयोदशी 17:04, 3 जून तक
नक्षत्र
चित्रा 07:41 तक
स्वाति 08:42, 3 जून तक
योग
वरीयान 18:26 तक
परिघअशुभ 17:29, 3 जून तक
करण
बालव 16:59 तक
कौलव 05:07, 3 जून तक
तैतिल 17:04, 3 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
16:22
चंद्रास्त
02:53
दिनमान
13h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:47
यमगंड
05:23 – 07:07
गुलिक काल
08:51 – 10:35

2 जून 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:23 – 07:07शुभ
रोग07:07 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:35टालें
चर10:35 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:47शुभ
काल15:47 – 17:31टालें
शुभ17:31 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:15 – 20:31शुभ
चर20:31 – 21:47सामान्य
रोग21:47 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:19टालें
लाभ00:19 – 01:35शुभ
उद्वेग01:35 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:07शुभ
अमृत04:07 – 05:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2306:32दिन
मंगल06:3207:42दिन
सूर्य07:4208:51दिन
शुक्र08:5110:00दिन
बुध10:0011:10दिन
चंद्र11:1012:19दिन
शनि12:1913:28दिन
गुरु13:2814:37दिन
मंगल14:3715:47दिन
सूर्य15:4716:56दिन
शुक्र16:5618:05दिन
बुध18:0519:15दिन
चंद्र19:1520:05रात
शनि20:0520:56रात
गुरु20:5621:47रात
मंगल21:4722:37रात
सूर्य22:3723:28रात
शुक्र23:2800:19रात
बुध00:1901:09रात
चंद्र01:0902:00रात
शनि02:0002:51रात
गुरु02:5103:42रात
मंगल03:4204:32रात
सूर्य04:3205:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जून 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 जून 2050ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
9 जून 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 जून 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 जून 2050मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जून 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जून 2050आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
23 जून 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 जुल॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5614° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।