20 जुलाई 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 20 जुलाई 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 जुलाई 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (06:20, 21 जुल॰ तक), नक्षत्र पुष्य (07:52 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 19:18 पर है। राहुकाल 12:27 से 14:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 19:18
रात 05:36 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जुलाई 2050 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 06:20, 21 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 07:52 तक
आश्लेषा 10:28, 21 जुल॰ तक
योग
वज्रअशुभ 08:24 तक
सिद्धि 09:02, 21 जुल॰ तक
करण
बालव 17:19 तक
कौलव 06:20, 21 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
19:18
चंद्रोदय
06:48
चंद्रास्त
20:03
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:27 – 14:10
यमगंड
07:18 – 09:01
गुलिक काल
10:44 – 12:27

20 जुलाई 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:36 – 07:18शुभ
अमृत07:18 – 09:01शुभ
काल09:01 – 10:44टालें
शुभ10:44 – 12:27शुभ
रोग12:27 – 14:10टालें
उद्वेग14:10 – 15:53टालें
चर15:53 – 17:36सामान्य
लाभ17:36 – 19:18शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:18 – 20:36टालें
शुभ20:36 – 21:53शुभ
अमृत21:53 – 23:10शुभ
चर23:10 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:44टालें
काल01:44 – 03:02टालें
लाभ03:02 – 04:19शुभ
उद्वेग04:19 – 05:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3606:44दिन
चंद्र06:4407:53दिन
शनि07:5309:01दिन
गुरु09:0110:10दिन
मंगल10:1011:18दिन
सूर्य11:1812:27दिन
शुक्र12:2713:36दिन
बुध13:3614:44दिन
चंद्र14:4415:53दिन
शनि15:5317:01दिन
गुरु17:0118:10दिन
मंगल18:1019:18दिन
सूर्य19:1820:10रात
शुक्र20:1021:01रात
बुध21:0121:53रात
चंद्र21:5322:44रात
शनि22:4423:36रात
गुरु23:3600:27रात
मंगल00:2701:19रात
सूर्य01:1902:10रात
शुक्र02:1003:02रात
बुध03:0203:53रात
चंद्र03:5304:45रात
शनि04:4505:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जुल॰ 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 जुल॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अग॰ 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अग॰ 2050श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
6 अग॰ 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अग॰ 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अग॰ 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 अग॰ 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अग॰ 2050भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
17 अग॰ 2050सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5632° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।