12 अगस्त 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 12 अगस्त 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (09:47 तक), नक्षत्र रोहिणी (06:25 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 19:03
रात 05:49 तक
तिथि
दशमी, 09:47 तक
एकादशी
नक्षत्र
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अगस्त 2050 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 09:47 तक
कृष्ण एकादशी 10:32, 13 अग॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 06:25 तक
मृगशिरा 07:46, 13 अग॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 15:13 तक
हर्षण 14:54, 13 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:47 तक
बव 22:06 तक
बालव 10:32, 13 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 19:02 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
01:10
चंद्रास्त
15:11
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:26
यमगंड
15:44 – 17:23
गुलिक काल
07:28 – 09:07

12 अगस्त 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:48 – 07:28सामान्य
लाभ07:28 – 09:07शुभ
अमृत09:07 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:26टालें
शुभ12:26 – 14:05शुभ
रोग14:05 – 15:44टालें
उद्वेग15:44 – 17:23टालें
चर17:23 – 19:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:03 – 20:24टालें
काल20:24 – 21:44टालें
लाभ21:44 – 23:05शुभ
उद्वेग23:05 – 00:26टालें
शुभ00:26 – 01:47शुभ
अमृत01:47 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:28सामान्य
रोग04:28 – 05:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4806:55दिन
बुध06:5508:01दिन
चंद्र08:0109:07दिन
शनि09:0710:13दिन
गुरु10:1311:19दिन
मंगल11:1912:26दिन
सूर्य12:2613:32दिन
शुक्र13:3214:38दिन
बुध14:3815:44दिन
चंद्र15:4416:50दिन
शनि16:5017:57दिन
गुरु17:5719:03दिन
मंगल19:0319:57रात
सूर्य19:5720:50रात
शुक्र20:5021:44रात
बुध21:4422:38रात
चंद्र22:3823:32रात
शनि23:3200:26रात
गुरु00:2601:20रात
मंगल01:2002:14रात
सूर्य02:1403:07रात
शुक्र03:0704:01रात
बुध04:0104:55रात
चंद्र04:5505:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 अग॰ 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अग॰ 2050भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
17 अग॰ 2050सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अग॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 अग॰ 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 सित॰ 2050अधिक भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 सित॰ 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 सित॰ 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5641° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।