17 अगस्त 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 17 अगस्त 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 अगस्त 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:17 तक), नक्षत्र आश्लेषा (16:50 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 12:25 से 14:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:58
रात 05:52 तक
तिथि
अमावस्या, 17:17 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आश्लेषा, 16:50 तक
मघा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अगस्त 2050 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 17:17 तक
शुक्ल प्रतिपदा 19:37, 18 अग॰ तक
नक्षत्र
मघा 19:43, 18 अग॰ तक
योग
वरीयान 16:26 तक
परिघअशुभ 17:18, 18 अग॰ तक
करण
नाग 17:17 तक
किंस्तुघ्न 06:25, 18 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 16:50 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
05:35
चंद्रास्त
18:38
दिनमान
13h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:51 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:25 – 14:03
यमगंड
07:29 – 09:08
गुलिक काल
10:46 – 12:25

17 अगस्त 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:51 – 07:29शुभ
अमृत07:29 – 09:08शुभ
काल09:08 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:25शुभ
रोग12:25 – 14:03टालें
उद्वेग14:03 – 15:41टालें
चर15:41 – 17:20सामान्य
लाभ17:20 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:58 – 20:20टालें
शुभ20:20 – 21:41शुभ
अमृत21:41 – 23:03शुभ
चर23:03 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:08टालें
लाभ03:08 – 04:30शुभ
उद्वेग04:30 – 05:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5106:57दिन
चंद्र06:5708:02दिन
शनि08:0209:08दिन
गुरु09:0810:13दिन
मंगल10:1311:19दिन
सूर्य11:1912:25दिन
शुक्र12:2513:30दिन
बुध13:3014:36दिन
चंद्र14:3615:41दिन
शनि15:4116:47दिन
गुरु16:4717:53दिन
मंगल17:5318:58दिन
सूर्य18:5819:53रात
शुक्र19:5320:47रात
बुध20:4721:41रात
चंद्र21:4122:36रात
शनि22:3623:30रात
गुरु23:3000:25रात
मंगल00:2501:19रात
सूर्य01:1902:14रात
शुक्र02:1403:08रात
बुध03:0804:03रात
चंद्र04:0304:57रात
शनि04:5705:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अग॰ 2050भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
17 अग॰ 2050सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अग॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 अग॰ 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 सित॰ 2050अधिक भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
4 सित॰ 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 सित॰ 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 सित॰ 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 सित॰ 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5643° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।