29 नवंबर 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 29 नवंबर 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 29 नवंबर 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (19:05 तक), नक्षत्र रोहिणी (16:16 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 14:46 से 16:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 17:23
रात 06:55 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:05 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 16:16 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 नवंबर 2050 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:05 तक
कृष्ण द्वितीया 18:03, 30 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 16:16 तक
मृगशिरा 15:48, 30 नव॰ तक
योग
सिद्ध 22:31 तक
साध्य 20:33, 30 नव॰ तक
करण
बालव 07:49 तक
कौलव 19:05 तक
तैतिल 06:30, 30 नव॰ तक
गर 18:03, 30 नव॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 03:58, 30 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
18:15
चंद्रास्त
07:19
दिनमान
10h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
14:46 – 16:05
यमगंड
09:32 – 10:50
गुलिक काल
12:09 – 13:27

29 नवंबर 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:54 – 08:13टालें
उद्वेग08:13 – 09:32टालें
चर09:32 – 10:50सामान्य
लाभ10:50 – 12:09शुभ
अमृत12:09 – 13:27शुभ
काल13:27 – 14:46टालें
शुभ14:46 – 16:05शुभ
रोग16:05 – 17:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:23 – 19:05टालें
लाभ19:05 – 20:46शुभ
उद्वेग20:46 – 22:28टालें
शुभ22:28 – 00:09शुभ
अमृत00:09 – 01:51शुभ
चर01:51 – 03:32सामान्य
रोग03:32 – 05:14टालें
काल05:14 – 06:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5407:47दिन
सूर्य07:4708:39दिन
शुक्र08:3909:32दिन
बुध09:3210:24दिन
चंद्र10:2411:16दिन
शनि11:1612:09दिन
गुरु12:0913:01दिन
मंगल13:0113:54दिन
सूर्य13:5414:46दिन
शुक्र14:4615:39दिन
बुध15:3916:31दिन
चंद्र16:3117:23दिन
शनि17:2318:31रात
गुरु18:3119:39रात
मंगल19:3920:46रात
सूर्य20:4621:54रात
शुक्र21:5423:02रात
बुध23:0200:09रात
चंद्र00:0901:17रात
शनि01:1702:24रात
गुरु02:2403:32रात
मंगल03:3204:40रात
सूर्य04:4005:47रात
शुक्र05:4706:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 दिस॰ 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 दिस॰ 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 दिस॰ 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 दिस॰ 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 दिस॰ 2050मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 दिस॰ 2050धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 दिस॰ 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 दिस॰ 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 दिस॰ 2050मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5683° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।