22 अगस्त 2051 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 22 अगस्त 2051, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 अगस्त 2051 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (07:05 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (10:51 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:53 पर है। राहुकाल 15:38 से 17:16 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:53
रात 05:54 तक
तिथि
प्रतिपदा, 04:13 तक
द्वितीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 10:51 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2051 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 07:05 तक
कृष्ण प्रतिपदा 04:13, 23 अग॰ तक
कृष्ण द्वितीया 01:11, 24 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 08:45, 23 अग॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:26, 23 अग॰ तक
सुकर्मा 20:54, 23 अग॰ तक
करण
बव 07:05 तक
बालव 17:41 तक
कौलव 04:13, 23 अग॰ तक
तैतिल 14:43, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:53
चंद्रोदय
18:57
चंद्रास्त
05:57
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2108
शक संवत
1973, प्रजापति संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
15:38 – 17:16
यमगंड
09:09 – 10:46
गुलिक काल
12:23 – 14:01

22 अगस्त 2051 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:54 – 07:31टालें
उद्वेग07:31 – 09:09टालें
चर09:09 – 10:46सामान्य
लाभ10:46 – 12:23शुभ
अमृत12:23 – 14:01शुभ
काल14:01 – 15:38टालें
शुभ15:38 – 17:16शुभ
रोग17:16 – 18:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:53 – 20:16टालें
लाभ20:16 – 21:39शुभ
उद्वेग21:39 – 23:01टालें
शुभ23:01 – 00:24शुभ
अमृत00:24 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:09सामान्य
रोग03:09 – 04:31टालें
काल04:31 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5406:59दिन
सूर्य06:5908:04दिन
शुक्र08:0409:09दिन
बुध09:0910:13दिन
चंद्र10:1311:18दिन
शनि11:1812:23दिन
गुरु12:2313:28दिन
मंगल13:2814:33दिन
सूर्य14:3315:38दिन
शुक्र15:3816:43दिन
बुध16:4317:48दिन
चंद्र17:4818:53दिन
शनि18:5319:48रात
गुरु19:4820:43रात
मंगल20:4321:39रात
सूर्य21:3922:34रात
शुक्र22:3423:29रात
बुध23:2900:24रात
चंद्र00:2401:19रात
शनि01:1902:14रात
गुरु02:1403:09रात
मंगल03:0904:04रात
सूर्य04:0404:59रात
शुक्र04:5905:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अग॰ 2051श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
25 अग॰ 2051संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अग॰ 2051कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 सित॰ 2051कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 सित॰ 2051प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 सित॰ 2051भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
9 सित॰ 2051विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 सित॰ 2051शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 सित॰ 2051कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2051प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 सित॰ 2051भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5784° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।