27 फ़रवरी 2054 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2054, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2054 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (00:05, 28 फ़र॰ तक), नक्षत्र स्वाति (11:39 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 11:07 से 12:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 18:19
रात 06:47 तक
तिथि
षष्ठी, 00:05 तक
सप्तमी
नक्षत्र
स्वाति, 11:39 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2054 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 00:05, 28 फ़र॰ तक
कृष्ण सप्तमी 00:34, 1 मार्च तक
नक्षत्र
स्वाति 11:39 तक
विशाखा 12:20, 28 फ़र॰ तक
योग
ध्रुव 21:26 तक
व्याघातअशुभ 20:35, 28 फ़र॰ तक
करण
गर 12:09 तक
वणिज 00:05, 28 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:13, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
तुला 06:05, 28 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
23:40
चंद्रास्त
10:17
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2110
शक संवत
1975, श्रीमुख संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
11:07 – 12:33
यमगंड
15:26 – 16:53
गुलिक काल
08:14 – 09:41

27 फ़रवरी 2054 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:48 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:41शुभ
अमृत09:41 – 11:07शुभ
काल11:07 – 12:33टालें
शुभ12:33 – 14:00शुभ
रोग14:00 – 15:26टालें
उद्वेग15:26 – 16:53टालें
चर16:53 – 18:19सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:19 – 19:53टालें
काल19:53 – 21:26टालें
लाभ21:26 – 23:00शुभ
उद्वेग23:00 – 00:33टालें
शुभ00:33 – 02:06शुभ
अमृत02:06 – 03:40शुभ
चर03:40 – 05:13सामान्य
रोग05:13 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4807:45दिन
बुध07:4508:43दिन
चंद्र08:4309:41दिन
शनि09:4110:38दिन
गुरु10:3811:36दिन
मंगल11:3612:33दिन
सूर्य12:3313:31दिन
शुक्र13:3114:29दिन
बुध14:2915:26दिन
चंद्र15:2616:24दिन
शनि16:2417:22दिन
गुरु17:2218:19दिन
मंगल18:1919:21रात
सूर्य19:2120:24रात
शुक्र20:2421:26रात
बुध21:2622:28रात
चंद्र22:2823:31रात
शनि23:3100:33रात
गुरु00:3301:35रात
मंगल01:3502:38रात
सूर्य02:3803:40रात
शुक्र03:4004:42रात
बुध04:4205:44रात
चंद्र05:4406:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मार्च 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 मार्च 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 मार्च 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 मार्च 2054फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 मार्च 2054विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मार्च 2054मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्च 2054शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 मार्च 2054प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 मार्च 2054फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
27 मार्च 2054संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6136° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।