14 दिसंबर 2054 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 14 दिसंबर 2054, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 दिसंबर 2054 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (04:11, 15 दिस॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (19:11 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:40 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:25
रात 07:06 तक
तिथि
पूर्णिमा, 04:11 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रोहिणी, 19:11 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 दिसंबर 2054 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 04:11, 15 दिस॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 02:18, 16 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 19:11 तक
मृगशिरा 18:07, 15 दिस॰ तक
योग
साध्य 22:10 तक
शुभ 19:31, 15 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:58 तक
बव 04:11, 15 दिस॰ तक
बालव 15:17, 15 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 06:42, 15 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
17:11
चंद्रास्त
06:06
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2111
शक संवत
1976, भाव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:40
यमगंड
10:58 – 12:15
गुलिक काल
13:33 – 14:50

14 दिसंबर 2054 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:05 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:40टालें
शुभ09:40 – 10:58शुभ
रोग10:58 – 12:15टालें
उद्वेग12:15 – 13:33टालें
चर13:33 – 14:50सामान्य
लाभ14:50 – 16:08शुभ
अमृत16:08 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:25 – 19:08सामान्य
रोग19:08 – 20:50टालें
काल20:50 – 22:33टालें
लाभ22:33 – 00:16शुभ
उद्वेग00:16 – 01:58टालें
शुभ01:58 – 03:41शुभ
अमृत03:41 – 05:23शुभ
चर05:23 – 07:06सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0507:57दिन
शनि07:5708:48दिन
गुरु08:4809:40दिन
मंगल09:4010:32दिन
सूर्य10:3211:23दिन
शुक्र11:2312:15दिन
बुध12:1513:07दिन
चंद्र13:0713:59दिन
शनि13:5914:50दिन
गुरु14:5015:42दिन
मंगल15:4216:34दिन
सूर्य16:3417:25दिन
शुक्र17:2518:34रात
बुध18:3419:42रात
चंद्र19:4220:50रात
शनि20:5021:59रात
गुरु21:5923:07रात
मंगल23:0700:16रात
सूर्य00:1601:24रात
शुक्र01:2402:32रात
बुध02:3203:41रात
चंद्र03:4104:49रात
शनि04:4905:57रात
गुरु05:5707:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 दिस॰ 2054मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2054धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2054संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 दिस॰ 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 दिस॰ 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 दिस॰ 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 दिस॰ 2054पौष अमावस्याअमावस्या
2 जन॰ 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 जन॰ 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6247° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।