9 मई 2055 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 9 मई 2055, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 9 मई 2055 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (14:10 तक), नक्षत्र चित्रा (00:48, 10 मई तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 17:20 से 19:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 19:01
रात 05:33 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:10 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
चित्रा, 00:48 तक
स्वाति
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मई 2055 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 14:10 तक
शुक्ल चतुर्दशी 11:00, 10 मई तक
नक्षत्र
चित्रा 00:48, 10 मई तक
स्वाति 22:31, 10 मई तक
योग
वज्रअशुभ 07:46 तक
सिद्धि 04:03, 10 मई तक
व्यतीपातअशुभ 00:26, 11 मई तक
करण
तैतिल 14:10 तक
गर 00:35, 10 मई तक
वणिज 11:00, 10 मई तक
चंद्र राशि
कन्या 14:00 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
17:11
चंद्रास्त
04:22
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2112
शक संवत
1977, युवा संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
17:20 – 19:01
यमगंड
12:17 – 13:58
गुलिक काल
15:39 – 17:20

9 मई 2055 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:34 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:56सामान्य
लाभ08:56 – 10:37शुभ
अमृत10:37 – 12:17शुभ
काल12:17 – 13:58टालें
शुभ13:58 – 15:39शुभ
रोग15:39 – 17:20टालें
उद्वेग17:20 – 19:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:01 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:39शुभ
चर21:39 – 22:58सामान्य
रोग22:58 – 00:17टालें
काल00:17 – 01:36टालें
लाभ01:36 – 02:55शुभ
उद्वेग02:55 – 04:14टालें
शुभ04:14 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3406:41दिन
शुक्र06:4107:48दिन
बुध07:4808:56दिन
चंद्र08:5610:03दिन
शनि10:0311:10दिन
गुरु11:1012:17दिन
मंगल12:1713:25दिन
सूर्य13:2514:32दिन
शुक्र14:3215:39दिन
बुध15:3916:46दिन
चंद्र16:4617:53दिन
शनि17:5319:01दिन
गुरु19:0119:53रात
मंगल19:5320:46रात
सूर्य20:4621:39रात
शुक्र21:3922:32रात
बुध22:3223:24रात
चंद्र23:2400:17रात
शनि00:1701:10रात
गुरु01:1002:02रात
मंगल02:0202:55रात
सूर्य02:5503:48रात
शुक्र03:4804:41रात
बुध04:4105:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 मई 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मई 2055वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
14 मई 2055संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 मई 2055वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मई 2055कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 मई 2055कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 मई 2055प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मई 2055ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 जून 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 जून 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6303° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।