1 अगस्त 2055 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 1 अगस्त 2055, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 अगस्त 2055 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (17:04 तक), नक्षत्र विशाखा (18:20 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 17:31 से 19:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 19:12
रात 05:43 तक
तिथि
नवमी, 17:04 तक
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 18:20 तक
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2055 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 17:04 तक
शुक्ल दशमी 15:50, 2 अग॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 18:20 तक
अनुराधा 17:53, 2 अग॰ तक
योग
शुक्ल 21:37 तक
ब्रह्म 19:40, 2 अग॰ तक
करण
बालव 05:51 तक
कौलव 17:04 तक
तैतिल 04:24, 2 अग॰ तक
गर 15:50, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
तुला 12:31 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
13:50
चंद्रास्त
00:22
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2112
शक संवत
1977, युवा संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
17:31 – 19:12
यमगंड
12:27 – 14:08
गुलिक काल
15:49 – 17:31

1 अगस्त 2055 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:42 – 07:23टालें
चर07:23 – 09:05सामान्य
लाभ09:05 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:27शुभ
काल12:27 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:31टालें
उद्वेग17:31 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:12 – 20:31शुभ
अमृत20:31 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:08सामान्य
रोग23:08 – 00:27टालें
काल00:27 – 01:46टालें
लाभ01:46 – 03:05शुभ
उद्वेग03:05 – 04:24टालें
शुभ04:24 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4206:50दिन
शुक्र06:5007:57दिन
बुध07:5709:05दिन
चंद्र09:0510:12दिन
शनि10:1211:19दिन
गुरु11:1912:27दिन
मंगल12:2713:34दिन
सूर्य13:3414:42दिन
शुक्र14:4215:49दिन
बुध15:4916:57दिन
चंद्र16:5718:04दिन
शनि18:0419:12दिन
गुरु19:1220:04रात
मंगल20:0420:57रात
सूर्य20:5721:49रात
शुक्र21:4922:42रात
बुध22:4223:35रात
चंद्र23:3500:27रात
शनि00:2701:20रात
गुरु01:2002:12रात
मंगल02:1203:05रात
सूर्य03:0503:58रात
शुक्र03:5804:50रात
बुध04:5005:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अग॰ 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अग॰ 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अग॰ 2055श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
11 अग॰ 2055संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2055कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2055सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2055कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 अग॰ 2055प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 अग॰ 2055भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
26 अग॰ 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6335° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।