28 जुलाई 2056 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 28 जुलाई 2056, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 जुलाई 2056 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (22:33 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (00:18, 29 जुल॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 10:45 से 12:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 19:14
रात 05:41 तक
तिथि
द्वितीया, 22:33 तक
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 00:18 तक
शतभिषा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2056 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 22:33 तक
कृष्ण तृतीया 22:30, 29 जुल॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 00:18, 29 जुल॰ तक
शतभिषा 01:00, 30 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 10:00 तक
सौभाग्य 08:40, 29 जुल॰ तक
करण
तैतिल 10:49 तक
गर 22:33 तक
वणिज 10:27, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 12:11 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
20:36
चंद्रास्त
06:56
दिनमान
13h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 12:27
यमगंड
15:50 – 17:32
गुलिक काल
07:22 – 09:04

28 जुलाई 2056 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:40 – 07:22सामान्य
लाभ07:22 – 09:04शुभ
अमृत09:04 – 10:45शुभ
काल10:45 – 12:27टालें
शुभ12:27 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:50टालें
उद्वेग15:50 – 17:32टालें
चर17:32 – 19:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:14 – 20:32टालें
काल20:32 – 21:51टालें
लाभ21:51 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:27टालें
शुभ00:27 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:04शुभ
चर03:04 – 04:22सामान्य
रोग04:22 – 05:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4006:48दिन
बुध06:4807:56दिन
चंद्र07:5609:04दिन
शनि09:0410:11दिन
गुरु10:1111:19दिन
मंगल11:1912:27दिन
सूर्य12:2713:35दिन
शुक्र13:3514:43दिन
बुध14:4315:50दिन
चंद्र15:5016:58दिन
शनि16:5818:06दिन
गुरु18:0619:14दिन
मंगल19:1420:06रात
सूर्य20:0620:58रात
शुक्र20:5821:51रात
बुध21:5122:43रात
चंद्र22:4323:35रात
शनि23:3500:27रात
गुरु00:2701:20रात
मंगल01:2002:12रात
सूर्य02:1203:04रात
शुक्र03:0403:56रात
बुध03:5604:49रात
चंद्र04:4905:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जुल॰ 2056संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अग॰ 2056कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 अग॰ 2056कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 अग॰ 2056प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 अग॰ 2056श्रावण अमावस्याअमावस्या
15 अग॰ 2056विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2056सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2056शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अग॰ 2056प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अग॰ 2056श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6474° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।