7 सितंबर 2056 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 7 सितंबर 2056, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 7 सितंबर 2056 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (03:06, 8 सित॰ तक), नक्षत्र पुष्य (08:06 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 13:52 से 15:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 18:35
रात 06:02 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:06 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 सितंबर 2056 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:06, 8 सित॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 01:29, 9 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 08:06 तक
आश्लेषा 07:45, 8 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 18:15 तक
शिव 16:05, 8 सित॰ तक
करण
गर 15:39 तक
वणिज 03:06, 8 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:22, 8 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
03:16
चंद्रास्त
17:10
दिनमान
12h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
13:52 – 15:26
यमगंड
06:02 – 07:36
गुलिक काल
09:10 – 10:44

7 सितंबर 2056 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:02 – 07:36शुभ
रोग07:36 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:44टालें
चर10:44 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 13:52शुभ
अमृत13:52 – 15:26शुभ
काल15:26 – 17:01टालें
शुभ17:01 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:35 – 20:01शुभ
चर20:01 – 21:27सामान्य
रोग21:27 – 22:53टालें
काल22:53 – 00:19टालें
लाभ00:19 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:11टालें
शुभ03:11 – 04:36शुभ
अमृत04:36 – 06:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0207:05दिन
मंगल07:0508:07दिन
सूर्य08:0709:10दिन
शुक्र09:1010:13दिन
बुध10:1311:16दिन
चंद्र11:1612:18दिन
शनि12:1813:21दिन
गुरु13:2114:24दिन
मंगल14:2415:26दिन
सूर्य15:2616:29दिन
शुक्र16:2917:32दिन
बुध17:3218:35दिन
चंद्र18:3519:32रात
शनि19:3220:29रात
गुरु20:2921:27रात
मंगल21:2722:24रात
सूर्य22:2423:21रात
शुक्र23:2100:19रात
बुध00:1901:16रात
चंद्र01:1602:13रात
शनि02:1303:11रात
गुरु03:1104:08रात
मंगल04:0805:05रात
सूर्य05:0506:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2056प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 सित॰ 2056भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
13 सित॰ 2056विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2056कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2056शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 सित॰ 2056प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 सित॰ 2056भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
28 सित॰ 2056संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अक्टू॰ 2056कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 अक्टू॰ 2056कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6490° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।