4 जुलाई 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 4 जुलाई 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 4 जुलाई 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (09:36 तक), नक्षत्र पुष्य (18:44 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 12:25 से 14:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 19:23
रात 05:28 तक
तिथि
द्वितीया, 09:36 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 18:44 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जुलाई 2057 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:36 तक
शुक्ल तृतीया 11:14, 5 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 18:44 तक
आश्लेषा 20:50, 5 जुल॰ तक
योग
हर्षण 21:37 तक
वज्रअशुभ 21:49, 5 जुल॰ तक
करण
कौलव 09:36 तक
तैतिल 22:29 तक
गर 11:14, 5 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
07:15
चंद्रास्त
21:18
दिनमान
13h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2114
शक संवत
1979, ईश्वर संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:25 – 14:10
यमगंड
07:12 – 08:57
गुलिक काल
10:41 – 12:25

4 जुलाई 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:28 – 07:12शुभ
अमृत07:12 – 08:57शुभ
काल08:57 – 10:41टालें
शुभ10:41 – 12:25शुभ
रोग12:25 – 14:10टालें
उद्वेग14:10 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:38सामान्य
लाभ17:38 – 19:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:23 – 20:38टालें
शुभ20:38 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:10शुभ
चर23:10 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:41टालें
काल01:41 – 02:57टालें
लाभ02:57 – 04:13शुभ
उद्वेग04:13 – 05:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2806:37दिन
चंद्र06:3707:47दिन
शनि07:4708:57दिन
गुरु08:5710:06दिन
मंगल10:0611:16दिन
सूर्य11:1612:25दिन
शुक्र12:2513:35दिन
बुध13:3514:44दिन
चंद्र14:4415:54दिन
शनि15:5417:03दिन
गुरु17:0318:13दिन
मंगल18:1319:23दिन
सूर्य19:2320:13रात
शुक्र20:1321:03रात
बुध21:0321:54रात
चंद्र21:5422:44रात
शनि22:4423:35रात
गुरु23:3500:25रात
मंगल00:2501:16रात
सूर्य01:1602:06रात
शुक्र02:0602:57रात
बुध02:5703:47रात
चंद्र03:4704:38रात
शनि04:3805:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जुल॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 जुल॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 जुल॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 जुल॰ 2057आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
16 जुल॰ 2057कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुल॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 जुल॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 जुल॰ 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 जुल॰ 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 जुल॰ 2057श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6604° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।