2 सितंबर 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 2 सितंबर 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 सितंबर 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (07:59 तक), नक्षत्र हस्त (11:16 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 17:06 से 18:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 18:41
रात 06:00 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
हस्त, 11:16 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 सितंबर 2057 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:59 तक
शुक्ल चतुर्थी 06:47, 3 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 11:16 तक
चित्रा 10:45, 3 सित॰ तक
योग
शुभ 07:29 तक
शुक्ल 05:27, 3 सित॰ तक
ब्रह्म 03:13, 4 सित॰ तक
करण
गर 07:59 तक
वणिज 19:25 तक
विष्टि (भद्रा) 06:47, 3 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 23:02 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
08:47
चंद्रास्त
20:54
दिनमान
12h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2114
शक संवत
1979, ईश्वर संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
17:06 – 18:41
यमगंड
12:20 – 13:55
गुलिक काल
15:30 – 17:06

2 सितंबर 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:59 – 07:35टालें
चर07:35 – 09:10सामान्य
लाभ09:10 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:55टालें
शुभ13:55 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 17:06टालें
उद्वेग17:06 – 18:41टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:41 – 20:06शुभ
अमृत20:06 – 21:31शुभ
चर21:31 – 22:55सामान्य
रोग22:55 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:10शुभ
उद्वेग03:10 – 04:35टालें
शुभ04:35 – 06:00शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5907:03दिन
शुक्र07:0308:06दिन
बुध08:0609:10दिन
चंद्र09:1010:13दिन
शनि10:1311:17दिन
गुरु11:1712:20दिन
मंगल12:2013:24दिन
सूर्य13:2414:27दिन
शुक्र14:2715:30दिन
बुध15:3016:34दिन
चंद्र16:3417:37दिन
शनि17:3718:41दिन
गुरु18:4119:37रात
मंगल19:3720:34रात
सूर्य20:3421:31रात
शुक्र21:3122:27रात
बुध22:2723:24रात
चंद्र23:2400:20रात
शनि00:2001:17रात
गुरु01:1702:14रात
मंगल02:1403:10रात
सूर्य03:1004:07रात
शुक्र04:0705:03रात
बुध05:0306:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 सित॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 सित॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 सित॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 सित॰ 2057भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 सित॰ 2057कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सित॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 सित॰ 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 सित॰ 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 सित॰ 2057आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6627° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।