16 नवंबर 2058 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 16 नवंबर 2058, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 16 नवंबर 2058 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:39 तक), नक्षत्र विशाखा (15:43 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 09:25 से 10:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:27
रात 06:45 तक
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
विशाखा, 15:43 तक
अनुराधा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2058 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 08:39 तक
शुक्ल प्रतिपदा 07:21, 17 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 15:43 तक
अनुराधा 14:57, 17 नव॰ तक
योग
शोभन 21:46 तक
अतिगंडअशुभ 19:21, 17 नव॰ तक
करण
नाग 08:39 तक
किंस्तुघ्न 20:03 तक
बव 07:21, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 09:51 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
06:42
चंद्रास्त
17:41
दिनमान
10h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2115
शक संवत
1980, बहुधान्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
09:25 – 10:45
यमगंड
13:26 – 14:46
गुलिक काल
06:44 – 08:04

16 नवंबर 2058 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:44 – 08:04टालें
शुभ08:04 – 09:25शुभ
रोग09:25 – 10:45टालें
उद्वेग10:45 – 12:05टालें
चर12:05 – 13:26सामान्य
लाभ13:26 – 14:46शुभ
अमृत14:46 – 16:06शुभ
काल16:06 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:27 – 19:06शुभ
उद्वेग19:06 – 20:46टालें
शुभ20:46 – 22:26शुभ
अमृत22:26 – 00:06शुभ
चर00:06 – 01:45सामान्य
रोग01:45 – 03:25टालें
काल03:25 – 05:05टालें
लाभ05:05 – 06:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4407:37दिन
गुरु07:3708:31दिन
मंगल08:3109:25दिन
सूर्य09:2510:18दिन
शुक्र10:1811:12दिन
बुध11:1212:05दिन
चंद्र12:0512:59दिन
शनि12:5913:52दिन
गुरु13:5214:46दिन
मंगल14:4615:39दिन
सूर्य15:3916:33दिन
शुक्र16:3317:27दिन
बुध17:2718:33रात
चंद्र18:3319:40रात
शनि19:4020:46रात
गुरु20:4621:53रात
मंगल21:5322:59रात
सूर्य22:5900:06रात
शुक्र00:0601:12रात
बुध01:1202:19रात
चंद्र02:1903:25रात
शनि03:2504:32रात
गुरु04:3205:38रात
मंगल05:3806:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2058कार्तिक अमावस्याअमावस्या
17 नव॰ 2058वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2058विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2058शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 नव॰ 2058प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 नव॰ 2058कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
4 दिस॰ 2058संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 दिस॰ 2058कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 दिस॰ 2058कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 दिस॰ 2058प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2058मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6796° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।