4 सितंबर 2059 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 4 सितंबर 2059, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 सितंबर 2059 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (23:57 तक), नक्षत्र पुष्य (10:12 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 13:54 से 15:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 18:39
रात 06:01 तक
तिथि
त्रयोदशी, 23:57 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुष्य, 10:12 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2059 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 23:57 तक
कृष्ण चतुर्दशी 02:08, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 10:12 तक
आश्लेषा 12:50, 5 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 04:01, 5 सित॰ तक
शिव 04:47, 6 सित॰ तक
करण
गर 10:57 तक
वणिज 23:57 तक
विष्टि (भद्रा) 13:01, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
03:22
चंद्रास्त
17:31
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2116
शक संवत
1981, प्रमाथी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:54 – 15:29
यमगंड
06:00 – 07:35
गुलिक काल
09:10 – 10:45

4 सितंबर 2059 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:00 – 07:35शुभ
रोग07:35 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:20सामान्य
लाभ12:20 – 13:54शुभ
अमृत13:54 – 15:29शुभ
काल15:29 – 17:04टालें
शुभ17:04 – 18:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:39 – 20:04शुभ
चर20:04 – 21:29सामान्य
रोग21:29 – 22:55टालें
काल22:55 – 00:20टालें
लाभ00:20 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:10टालें
शुभ03:10 – 04:35शुभ
अमृत04:35 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0007:03दिन
मंगल07:0308:07दिन
सूर्य08:0709:10दिन
शुक्र09:1010:13दिन
बुध10:1311:16दिन
चंद्र11:1612:20दिन
शनि12:2013:23दिन
गुरु13:2314:26दिन
मंगल14:2615:29दिन
सूर्य15:2916:33दिन
शुक्र16:3317:36दिन
बुध17:3618:39दिन
चंद्र18:3919:36रात
शनि19:3620:33रात
गुरु20:3321:29रात
मंगल21:2922:26रात
सूर्य22:2623:23रात
शुक्र23:2300:20रात
बुध00:2001:17रात
चंद्र01:1702:13रात
शनि02:1303:10रात
गुरु03:1004:07रात
मंगल04:0705:04रात
सूर्य05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 सित॰ 2059प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 सित॰ 2059भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2059विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2059कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2059शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2059प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 सित॰ 2059भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
25 सित॰ 2059संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 सित॰ 2059कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 अक्टू॰ 2059कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6907° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।