17 अप्रैल 2062 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 17 अप्रैल 2062, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 17 अप्रैल 2062 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (02:40, 18 अप्रैल तक), नक्षत्र पुष्य (18:29 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 07:30 से 09:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:48
रात 05:52 तक
तिथि
नवमी, 02:40 तक
दशमी
नक्षत्र
पुष्य, 18:29 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अप्रैल 2062 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:40, 18 अप्रैल तक
शुक्ल दशमी 01:05, 19 अप्रैल तक
नक्षत्र
पुष्य 18:29 तक
आश्लेषा 17:32, 18 अप्रैल तक
योग
धृति 13:32 तक
शूलअशुभ 11:00, 18 अप्रैल तक
करण
बालव 15:33 तक
कौलव 02:40, 18 अप्रैल तक
तैतिल 13:50, 18 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
12:33
चंद्रास्त
01:56
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2119
शक संवत
1984, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
07:30 – 09:07
यमगंड
10:44 – 12:20
गुलिक काल
13:57 – 15:34

17 अप्रैल 2062 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:53 – 07:30शुभ
काल07:30 – 09:07टालें
शुभ09:07 – 10:44शुभ
रोग10:44 – 12:20टालें
उद्वेग12:20 – 13:57टालें
चर13:57 – 15:34सामान्य
लाभ15:34 – 17:11शुभ
अमृत17:11 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:48 – 20:11सामान्य
रोग20:11 – 21:34टालें
काल21:34 – 22:57टालें
लाभ22:57 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 01:43टालें
शुभ01:43 – 03:06शुभ
अमृत03:06 – 04:29शुभ
चर04:29 – 05:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5306:58दिन
शनि06:5808:02दिन
गुरु08:0209:07दिन
मंगल09:0710:11दिन
सूर्य10:1111:16दिन
शुक्र11:1612:20दिन
बुध12:2013:25दिन
चंद्र13:2514:30दिन
शनि14:3015:34दिन
गुरु15:3416:39दिन
मंगल16:3917:43दिन
सूर्य17:4318:48दिन
शुक्र18:4819:43रात
बुध19:4320:38रात
चंद्र20:3821:34रात
शनि21:3422:29रात
गुरु22:2923:25रात
मंगल23:2500:20रात
सूर्य00:2001:15रात
शुक्र01:1502:11रात
बुध02:1103:06रात
चंद्र03:0604:01रात
शनि04:0104:57रात
गुरु04:5705:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अप्रैल 2062शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अप्रैल 2062प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अप्रैल 2062चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
27 अप्रैल 2062संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 मई 2062कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 मई 2062कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 मई 2062प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 मई 2062वैशाख अमावस्याअमावस्या
12 मई 2062विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2062वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7273° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।