20 मई 2063 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 20 मई 2063, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 मई 2063 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:02, 21 मई तक), नक्षत्र धनिष्ठा (18:47 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 19:07 पर है। राहुकाल 17:25 से 19:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 19:07
रात 05:27 तक
तिथि
अष्टमी, 04:02 तक
नवमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 18:47 तक
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मई 2063 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:02, 21 मई तक
कृष्ण नवमी 06:21, 22 मई तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:45, 21 मई तक
योग
इंद्र 04:26, 21 मई तक
वैधृतिअशुभ 05:18, 22 मई तक
करण
बालव 14:46 तक
कौलव 04:02, 21 मई तक
तैतिल 17:14, 21 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
19:07
चंद्रोदय
00:47
चंद्रास्त
12:02
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2120
शक संवत
1985, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
17:25 – 19:07
यमगंड
12:17 – 14:00
गुलिक काल
15:42 – 17:25

20 मई 2063 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:27 – 07:10टालें
चर07:10 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:35शुभ
अमृत10:35 – 12:17शुभ
काल12:17 – 14:00टालें
शुभ14:00 – 15:42शुभ
रोग15:42 – 17:25टालें
उद्वेग17:25 – 19:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:07 – 20:25शुभ
अमृत20:25 – 21:42शुभ
चर21:42 – 23:00सामान्य
रोग23:00 – 00:17टालें
काल00:17 – 01:35टालें
लाभ01:35 – 02:52शुभ
उद्वेग02:52 – 04:10टालें
शुभ04:10 – 05:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2706:36दिन
शुक्र06:3607:44दिन
बुध07:4408:52दिन
चंद्र08:5210:01दिन
शनि10:0111:09दिन
गुरु11:0912:17दिन
मंगल12:1713:26दिन
सूर्य13:2614:34दिन
शुक्र14:3415:42दिन
बुध15:4216:51दिन
चंद्र16:5117:59दिन
शनि17:5919:07दिन
गुरु19:0719:59रात
मंगल19:5920:51रात
सूर्य20:5121:42रात
शुक्र21:4222:34रात
बुध22:3423:26रात
चंद्र23:2600:17रात
शनि00:1701:09रात
गुरु01:0902:00रात
मंगल02:0002:52रात
सूर्य02:5203:44रात
शुक्र03:4404:35रात
बुध04:3505:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 मई 2063कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 मई 2063कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 मई 2063प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 मई 2063ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
31 मई 2063विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 जून 2063शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2063प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2063ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2063संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जून 2063मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7425° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।