15 अक्टूबर 2069 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2069, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2069 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (09:33 तक), नक्षत्र चित्रा (04:00, 16 अक्टू॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 14:58 से 16:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:51
रात 06:22 तक
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
चित्रा, 04:00 तक
स्वाति
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2069 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 09:33 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:07, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 04:00, 16 अक्टू॰ तक
स्वाति 07:07, 17 अक्टू॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 18:39 तक
विष्कंभअशुभ 19:38, 16 अक्टू॰ तक
करण
नाग 09:33 तक
किंस्तुघ्न 22:49 तक
बव 12:07, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 14:29 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
06:20
चंद्रास्त
17:55
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2126
शक संवत
1991, विरोधी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:32
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
14:58 – 16:25
यमगंड
09:14 – 10:40
गुलिक काल
12:06 – 13:32

15 अक्टूबर 2069 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:22 – 07:48टालें
उद्वेग07:48 – 09:14टालें
चर09:14 – 10:40सामान्य
लाभ10:40 – 12:06शुभ
अमृत12:06 – 13:32शुभ
काल13:32 – 14:58टालें
शुभ14:58 – 16:25शुभ
रोग16:25 – 17:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:51 – 19:25टालें
लाभ19:25 – 20:59शुभ
उद्वेग20:59 – 22:33टालें
शुभ22:33 – 00:06शुभ
अमृत00:06 – 01:40शुभ
चर01:40 – 03:14सामान्य
रोग03:14 – 04:48टालें
काल04:48 – 06:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2207:19दिन
सूर्य07:1908:16दिन
शुक्र08:1609:14दिन
बुध09:1410:11दिन
चंद्र10:1111:09दिन
शनि11:0912:06दिन
गुरु12:0613:04दिन
मंगल13:0414:01दिन
सूर्य14:0114:58दिन
शुक्र14:5815:56दिन
बुध15:5616:53दिन
चंद्र16:5317:51दिन
शनि17:5118:53रात
गुरु18:5319:56रात
मंगल19:5620:59रात
सूर्य20:5922:01रात
शुक्र22:0123:04रात
बुध23:0400:06रात
चंद्र00:0601:09रात
शनि01:0902:12रात
गुरु02:1203:14रात
मंगल03:1404:17रात
सूर्य04:1705:20रात
शुक्र05:2006:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अक्टू॰ 2069आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 अक्टू॰ 2069तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2069विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 अक्टू॰ 2069शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 अक्टू॰ 2069प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 अक्टू॰ 2069आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
2 नव॰ 2069संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 नव॰ 2069कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 नव॰ 2069कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 नव॰ 2069प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2069कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8320° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।