14 अप्रैल 2070 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 14 अप्रैल 2070, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 अप्रैल 2070 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (19:08 तक), नक्षत्र रोहिणी (03:39, 15 अप्रैल तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 07:32 से 09:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:46
रात 05:55 तक
तिथि
चतुर्थी, 19:08 तक
पंचमी
नक्षत्र
रोहिणी, 03:39 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अप्रैल 2070 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 19:08 तक
शुक्ल पंचमी 16:17, 15 अप्रैल तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:39, 15 अप्रैल तक
मृगशिरा 01:44, 16 अप्रैल तक
योग
आयुष्मान 06:32 तक
सौभाग्य 02:56, 15 अप्रैल तक
शोभन 23:35, 15 अप्रैल तक
करण
वणिज 08:40 तक
विष्टि (भद्रा) 19:08 तक
बव 05:40, 15 अप्रैल तक
बालव 16:17, 15 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
08:31
चंद्रास्त
22:26
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2127
शक संवत
1992, विकृति संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
07:32 – 09:09
यमगंड
10:45 – 12:21
गुलिक काल
13:57 – 15:34

14 अप्रैल 2070 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:56 – 07:32शुभ
काल07:32 – 09:09टालें
शुभ09:09 – 10:45शुभ
रोग10:45 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 13:57टालें
चर13:57 – 15:34सामान्य
लाभ15:34 – 17:10शुभ
अमृत17:10 – 18:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:46 – 20:10सामान्य
रोग20:10 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:57टालें
लाभ22:57 – 00:21शुभ
उद्वेग00:21 – 01:44टालें
शुभ01:44 – 03:08शुभ
अमृत03:08 – 04:32शुभ
चर04:32 – 05:55सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5607:00दिन
शनि07:0008:05दिन
गुरु08:0509:09दिन
मंगल09:0910:13दिन
सूर्य10:1311:17दिन
शुक्र11:1712:21दिन
बुध12:2113:25दिन
चंद्र13:2514:29दिन
शनि14:2915:34दिन
गुरु15:3416:38दिन
मंगल16:3817:42दिन
सूर्य17:4218:46दिन
शुक्र18:4619:42रात
बुध19:4220:38रात
चंद्र20:3821:33रात
शनि21:3322:29रात
गुरु22:2923:25रात
मंगल23:2500:21रात
सूर्य00:2101:16रात
शुक्र01:1602:12रात
बुध02:1203:08रात
चंद्र03:0804:04रात
शनि04:0404:59रात
गुरु04:5905:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अप्रैल 2070विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2070मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैल 2070शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 अप्रैल 2070प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 अप्रैल 2070चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
29 अप्रैल 2070संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 मई 2070कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 मई 2070कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 मई 2070प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 मई 2070वैशाख अमावस्याअमावस्या
13 मई 2070विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8390° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।